फिर भी सब हरा है
शब-ए-घोर अंधियारे में ,आज करूणा-कंठ भरे हैंकठोर हृदय मृदुल हुआ,सब आँखों में नीर झरे हैदशा देखें धनवान् की,या निर्धन के पास ये धरा हैअसंख्य तकलीफें हैं जीवन मे,फिर भी सब हरा है कहीं भूखे सोते लोग,कहीं अनाज का ढेर पङा हैकहीं सुख की सेज सजी है,कहीं दु:खों का डेरा हैजुल्म हुआ जुल्मी पर या जुल्मों […]