प्रेम है, बसंत हैं।
प्रेम है, बसंत हैं। राह तकती है पंखुड़ियांतितलियों कीजानती है वे बैठ बालियों परपराग निचोड़ उड़ जाएंगीफिर भी जाने क्योंउन्हें आस रहता सदावे आ कर फूलो बढ़ता बोझसोख़ बसंत खिलाएंगी। नीली पाखी चहकते-मटकतेआ बैठी फिर ठूंठ परतिनका दबाए नज़रें बचाएंदो साखो का बीच कहींठहर जाने को एक छत बनाएंठूंठा पेड़ सूखा पड़ा,बेजान हर सावन रहाउन […]