युवा का अब आगाज हो

युवा का अब आगाज हो युवा का अब आगाज हो,एक नया अन्दाज़ हो,सिंह की आवाज हो,हर युवा जांबाज़ हो। हृदय विशाल जहाज़ हो,निर्भीक समक्ष यमराज हो,उज्ज्वल आभामय पुखराज़ हो,योग्य योद्धा योगीराज हो। जहाँ उम्र की दराज हो,वहाँ बड़ों का लिहाज़

ज़िक्र मातरे वतन से जुड़ा होगा। – प्रज्ञेश कुमार “शांत”

हमवतन साथियों, हम आसमाँ की बुलंदी पे हों या धरातल की गहराई में, हर ज़िक्र मातरे वतन से जुड़ा होगा। हम चमकते सितारे हों या डूबता सूरज, हर ज़िक्र मातरे वतन से जुड़ा होगा। हम धधकते अंगारे हों या पिघलती बर्फ़, हर
Powered By Indic IME
error: Content is protected !!