ग़म-ए-शायरी

ग़म-ए-शायरी दिल-ए-दर्द को शब्दों मे बयां कर दूंगा‌ आंखों के आंसूओं को पन्नों पर लिख दूंगामै पाप,मद और अत्याचार का विरोधी हूं‌‌‌‌‌ समय आने पर तुम्हारे दिलों मे लिख दूंगा अज़य महिया

कविता-मौत की दस्तक

कविता-मौत की दस्तक मै जीवन की आशाओं में खोया थामै ज़ीवन की निराशाओं मे रोया थामै‌ उस मौत-ए-महबूबा को भूलकरमै कल फिर से उठने के लिए सोया था रात के घनघोर अंधेरे मे किसी ने मेरे,दिल-ए द्वार पर यकायक दस्तक दीमै एकाएक चौंका और इज़्तिराब

एक जीवन ऐसा भी……

एक जीवन ऐसा भी…… जीवन की तन्हाई को महसूस करसांसों को रोके जा‌ रहा‌ हूं मैं ।नुमाईसें तो बहुत‌ हैं मेरे अंदरफिर भी प्यार निभा रहा हूं मैं।। किस ने देखी दीपक की बातीकि वो अंधियारे को मिटा देती‌ है।फिर भी हे साखी !‌‌ ‌ ‌ ‌ ‌‌‌ ‌ उसी‌ को

सत्य को सहारा दो

सत्य को सहारा दो दीपक हूँ मैं मुझे रोशन होने दोतुम्हे‌ न्याय दिलाने के‌ लिए मुझे लड़ने दोजली है समा मेरे भीतर परोपकार कीमुझे ईक ऩजर भरकर सत्य को देखने दोनहीं जानता कब और कैसे होगी जीत मेरीलेकिन तुम सच्चाई के लिए मेरा साथ तो‌ दोमै जानता

इश्क की गली

इश्क की गली हमको, रास ना आएजो रास आए ,उसको हम खो ना पाएंएक नाव पर सवार होकर,चलना चाहता हू़ंतु ही नाविक है ए-खुदा,जिन्दड़ी पार लगाई

मैं पथ हूँ

मैं पथ हूँ, मेरा ह्रदय छलनी मत करो मैं रोता हूँ, तुम देखने की कोशिश करो क्या गुनाह किया मैंने जो दर्द

संगीत‌ मे ईश्वर

वो जो खुमार है,वो बेसुमार है‌‌‌‌‌‌‌‌ वो दिल की दिवारों पर सवार है, वो जो सवार है,वो घुड़सवार हैसूनो ,इसे तो घोड़े से ही प्यार है, वो जो प्यार है,वो ही एतबार हैसुनो ,वही तो प्रमुख गीतकार है, वो जो गीत है,वो ही स़गीत‌ हैदेखो,वही तो

सत्य जीवन का

मै जीवन की आशाओं में खोया थामै ज़ीवन की निराशाओं मे रोया थाउस मौत-ए-महबूबा को भूलकरमै कल उठने के लिए सोया था रात के घनघोर अंधेरे मे किसी ने मेरे,दिल-ए द्वार पर यकायक दस्तक दीमै एकाएक चौंका और इज़्तिराब सेआंखें खोलकर उठ खड़ा हुआ मैने
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