परमवीर चक्र …वीरों का पर्व

परमवीर चक्र …वीरों का पर्व …

परमवीर चक्र,
जब होता ज़िक्र,
सिर शान से ऊंचा,
होता है फ़ख्र ।   4

इक्कीस जांबाज़,
को मिला ये ताज,
हिन्द भाव विभोर,
रक्खी जो लाज ।   8

उच्च सैन्य सम्मान,
त्याग व बलिदान,
शूरवीरता शौर्य,
वीर को ये प्रदान ।   12

अरुण खेत्रपाल,
एक ऐसा नाम,
रोशन हुआ हिन्द,
है नमन सलाम ।    16

सेकेंड लेफ़्टिनेंट,
अपराजित क्षण,
ख़ून से लथपथ,
फ़िर भी दमखम ।     20

उम्र इक्कीस साल,
हाथों में ढाल,
रौंद डाला दुश्मन,
कर दिया कमाल ।   24

भीषण थी आग,
टैंक ख़ुद का राख़,
था अरुण अडिग पर,
शत्रू रहा मार ।    28

था अदम्य साहस,
वो दस के बराबर,
ना भागे पीछे,
था सीना हाज़िर ।    32

फ़ायर की क्षमता,
थी गज़ब की निष्ठा,
घायल था फ़िर भी,
की घोर तपस्या ।    36

कई टैंक किए ध्वस्त,
पाक हो रहा पस्त,
यही दिली तमन्ना,
आन हिन्द का ध्वज ।    40

वापिस तुम लौटो,
युद्ध बीच में छोड़ो,
ये हुआ आदेश,
पालन से परहेज़ । 44

ना मुड़ा अरुण,
जज़्बा व जुनून,
देश सबसे पहले,
पक्की थी धुन । 48

शत्रू ने दागा,
गोला वो अभागा,
हुआ अरुण शहीद,
पसरा सन्नाटा । 52

प्राप्त वीरगति,
नम थी माटी,
खोया था सपूत,
सच्चा साथी । 56

दी एक मिसाल,
याद सालों साल,
विरला ही होगा,
जो त्यागे प्राण । 60

माने है लोहा,
हर कोना कोना,
खो ऐसा बहादुर,
सूरज भी रोता । 64

पाक भी मुरीद,
दुआ और आशीष,
वैरी करे तारीफ़,
सबसे बड़ी जीत । 68

अनुकरणीय हिम्मत,
आंक सको ना कीमत,
चट्टान दीवार,
हौंसले ना सीमित । 72

ऐसे अवतार,
आते एक बार,
उनकी जो कमी,
होए ना बयान,
होए ना बयान । 77

स्वरचित – अभिनव ✍

कविता