तुम्हे मिलने मै आऊंगा जरूर
कभी राम बनकर
कभी कृष्ण बनकर
कभी सीता बनकर
कभी राधा बनकर
कभी पति बनकर
कभी पत्नी बनकर
कभी पुत्र बनकर
कभी पुत्री बनकर
मैं तुम्हे याद आऊंगा जरूर
कभी कलम बनकर
कभी किताब बनकर
कभी ख्वाब बनकर
कभी नींद बनकर
कभी सपना बनकर
मैं तुम्हे देखने आऊंगा जरूर
कभी रात बनकर
कभी दिन बनकर
कभी सितारे बनकर
तो कभी चाँद बनकर
कभी छाँव बनकर
तो कभी धूप बनकर
आऊंगा जरूर आऊंगा जरूर
आऊंगा जरूर – अज़य कीर्ति
Related Posts
इरफ़ान ख़ान, हर दिल की जान
इरफ़ान ख़ान, हर दिल की जान इरफ़ान ख़ान,हर दिल की जान,एक अलग पहचान,एक अलग पहचान । ४…
ग़म-ए-शायरी
ग़म-ए-शायरी दिल-ए-दर्द को शब्दों मे बयां कर दूंगा आंखों के आंसूओं को पन्नों पर…
उनसे ही रोशन ये दिल है
उनसे ही रोशन ये दिल है मैं रात रात भर रोता हूं,खुद रोते रोते सोता हूं,कोई पूछने…
मैं उसके घर गया था
मैं उसके घर गया थाअपने किसी काम सेउसके शौहर से मिलावो भी वाकिफ़ था मेरे नाम…
आपसा देश भक्त ना उत्पन्न अब तक
आपसा देश भक्त ना उत्पन्न अब तक …. माननीय प्रधान मंत्री,जन सेवक, भले मानस, संतरी…
बस अभी अभी तो
बस अभी अभी तो…. अभी सूरज ढलाअभी चांद आ गयारात आंखों में थीमैं बोतल में आ गया अभी…
इश्क की गली
इश्क की गली हमको, रास ना आएजो रास आए ,उसको हम खो ना पाएंएक नाव पर सवार होकर,चलना…
रीझ-रीझ कर खीझ रहा हूँ
रीझ-रीझ कर खीझ रहा हूँ , जब से जग में होश संँभाला । प्रेम पुरातन याद नहीं…
युवा का अब आगाज हो
युवा का अब आगाज हो युवा का अब आगाज हो,एक नया अन्दाज़ हो,सिंह की आवाज हो,हर युवा…
पांच का जादू
पांच का जादू वो २२ मार्च,वो बजे थे पांच । शाम का आगाज़,कुछ अलग और ख़ास । वो पांच…
कविता की लंबाई… पे मत जा भाई
कविता की लंबाई… पे मत जा भाई … कविता जब शुरू करता हूं लिखनी,कोशिश कि बन पड़े…
विरह – कविता -शिल्पी प्रसाद
तुम जान लो,मैं जानती हूंये बातों की लड़ीजो स्वाभाविक आजमेरी जीवन कीशैली हो गई…
और जब मोहब्बत का रुख़ बदलेगा..
और जब मोहब्बत कारुख़ बदलेगाअपनी दिखावट सेअपने होने भर केअहसास मेंतब,अपनी कहानी…
विरह के दीप – कविता
खुशियों के दीप जलें हैं तुम पर हरिताभा-सी छाई है |विरहिणी की दीवार पर…
फिर भी सब हरा है
शब-ए-घोर अंधियारे में ,आज करूणा-कंठ भरे हैंकठोर हृदय मृदुल हुआ,सब आँखों में नीर…
दादी कहानी सुनाओ ना !!
दादी कहानी सुनाओ ना !! दादी मां दादी मां कहानी एक सुनाओराजा रानी घोड़ा गाड़ी की…
कैसे कह दूं कि तुम नहीं मेरे हो !
कैसे कह दूं कि तुम नहीं मेरे हो ! … कैसे कह दूं कि तुम नहीं मेरे हो !तुम मेरे…
|| प्रेमी की भक्ति – यक्ष प्रश्नोत्तर।।
|| प्रेमी की भक्ति - यक्ष प्रश्नोत्तर।। भगवान् में गहरी आस्था रखने वाले एक भक्त…
मैं पथ हूँ
मैं पथ हूँ, मेरा ह्रदय छलनी मत करो मैं रोता हूँ, तुम देखने की कोशिश करो क्या…
ज़िंदगी – कविता अभिनव कुमार
ज़िंदगी ज़िंदगी एक बोझ है,आज के इंसान की यही खोज है । अरे ज़िंदगी तो एक बहार…







































