इश्क की गली हमको, रास ना आए
जो रास आए ,उसको हम खो ना पाएं
एक नाव पर सवार होकर,चलना चाहता हू़ं
तु ही नाविक है ए-खुदा,जिन्दड़ी पार लगाई
Related Posts
इरफ़ान ख़ान, हर दिल की जान
इरफ़ान ख़ान, हर दिल की जान इरफ़ान ख़ान,हर दिल की जान,एक अलग पहचान,एक अलग पहचान । ४…
उनसे ही रोशन ये दिल है
उनसे ही रोशन ये दिल है मैं रात रात भर रोता हूं,खुद रोते रोते सोता हूं,कोई पूछने…
ग़म-ए-शायरी
ग़म-ए-शायरी दिल-ए-दर्द को शब्दों मे बयां कर दूंगा आंखों के आंसूओं को पन्नों पर…
मैं उसके घर गया था
मैं उसके घर गया थाअपने किसी काम सेउसके शौहर से मिलावो भी वाकिफ़ था मेरे नाम…
आपसा देश भक्त ना उत्पन्न अब तक
आपसा देश भक्त ना उत्पन्न अब तक …. माननीय प्रधान मंत्री,जन सेवक, भले मानस, संतरी…
बस अभी अभी तो
बस अभी अभी तो…. अभी सूरज ढलाअभी चांद आ गयारात आंखों में थीमैं बोतल में आ गया अभी…
रीझ-रीझ कर खीझ रहा हूँ
रीझ-रीझ कर खीझ रहा हूँ , जब से जग में होश संँभाला । प्रेम पुरातन याद नहीं…
युवा का अब आगाज हो
युवा का अब आगाज हो युवा का अब आगाज हो,एक नया अन्दाज़ हो,सिंह की आवाज हो,हर युवा…
पांच का जादू
पांच का जादू वो २२ मार्च,वो बजे थे पांच । शाम का आगाज़,कुछ अलग और ख़ास । वो पांच…
और जब मोहब्बत का रुख़ बदलेगा..
और जब मोहब्बत कारुख़ बदलेगाअपनी दिखावट सेअपने होने भर केअहसास मेंतब,अपनी कहानी…
विरह के दीप – कविता
खुशियों के दीप जलें हैं तुम पर हरिताभा-सी छाई है |विरहिणी की दीवार पर…
कविता की लंबाई… पे मत जा भाई
कविता की लंबाई… पे मत जा भाई … कविता जब शुरू करता हूं लिखनी,कोशिश कि बन पड़े…
विरह – कविता -शिल्पी प्रसाद
तुम जान लो,मैं जानती हूंये बातों की लड़ीजो स्वाभाविक आजमेरी जीवन कीशैली हो गई…
मैं पथ हूँ
मैं पथ हूँ, मेरा ह्रदय छलनी मत करो मैं रोता हूँ, तुम देखने की कोशिश करो क्या…
ज़िंदगी – कविता अभिनव कुमार
ज़िंदगी ज़िंदगी एक बोझ है,आज के इंसान की यही खोज है । अरे ज़िंदगी तो एक बहार…
ना तेरा कसूर है…ना मेरा कसूर – बृजेश यादव
ये जो मदहोशी सी छायी है, तेरे हुस्न का सब कसूर है। ये जो खोया खोया सा मैं रहता…
प्रेम एक स्वछंद धारा
प्रेम एक स्वछंद धारा एक प्रेम भरी दृष्टि और दो मीठे स्नेहिल…
मेरा सैनिक, मेरी जीत
मेरा सैनिक, मेरी जीत … आज कारगिल दिवस,हूँ मैं नतमस्तक,दुश्मन हो जब तक,मेरा वीर…
मै ही हूं – अजय कीर्ति – इश्क का राही
मै ही इश्क हूं,मै ही मौहब्बत हूंमै ही प्यार और मै ही एतबार हूंमै ही नशा हूं ,मै…
हम – कविता
हम चाय के शौकीन हमधुन में अपनी लीन हमजब लगेगी अपनी किस्मतहोंगे तब रंगीन हम छा…






































