आत्म विश्वास से जीती जा सकती है दुनिया

आत्म विश्वास आत्मा की शक्ति को दर्शाता है और वही विश्वास कठिन से कठिन कार्य को करने में सफलता अर्जित कर पाता है

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आत्म विश्वास से जीती जा सकती है दुनिया

यह दुनिया बहुत बड़ी है यहां पर प्रतिभा और कला की कोई भी कमी नहीं है। ऐसी न जाने कितनी आश्चर्यजनक घटनाएं आपने सुनी होंगी जब उस कार्य के होने की संभावनाएं खत्म हो गई फिर भी किसी व्यक्ति द्वारा वह कार्य कर दिया गया, यह शारीरिक शक्ति के कारण नहीं बल्कि आत्मविश्वास के कारण हुआ। आत्मविश्वास में इतनी ताकत होती है कि आप दुनिया को अपने कदमों पर झुका दो। आत्मविश्वास के बारे में अधिकतर लोगों का प्रश्न यही होता है कि आखिर क्या होता है आत्मा विश्वास तो चलिए आज हम चर्चा करेंगे आत्मविश्वास की।

आत्मविश्वास-: आत्मविश्वास शब्द की व्युत्पत्ति दो शब्दों से मिलकर हुई है आत्मा और विश्वास। आत्मा का मतलब होता है स्वयं से और विश्वास यानी भरोसा। कोई भी कार्य करते समय स्वयं पर यह भरोसा होना कि वह उस कार्य को कर सकता है वही आत्मविश्वास होता है। आत्मा विश्वास में बड़ी ताकत होती है शारीरिक ताकत से भी ज्यादा। क्योंकि आत्म विश्वास आत्मा की शक्ति को दर्शाता है और वही विश्वास कठिन से कठिन कार्य को करने में सफलता अर्जित कर पाता है।

महमूद गजनबी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया लेकिन उसे लगातार 16 बार युद्ध में हार प्राप्त हुई, परन्तु 17 वीं बार उसे सफलता प्राप्त हुई और उस ने भारत पर विजय प्राप्त की। लगातार आक्रमण और हर बार मिली विफलता ने उसके आत्मा विश्वास को कम नहीं किया क्योंकि उसे स्वयं पर विश्वास था कि एक दिन वह भारत पर विजय प्राप्त करके रहेगा।

युवाओं में कम हो रहा आत्मविश्वास

आजकल युवाओं में आत्मा विश्वास की कमी होती जा रही है, प्रथम प्रयास में असफल होने के बाद ही उनकी आंतरिक शक्ति और स्वयं पर विश्वास खत्म हो जाता है और वह निराशा के भंवर में फसते चले जाते हैं और प्रयास करना छोड़ देते हैं जबकि आपकी हार का और विफलता का सबसे बड़ा कारण यही है कि आपने प्रयास करना ही छोड़ दिया। जो लोग लगातार प्रयास कर रहे हैं वह हारे नहीं है उन्हें सफलता कभी भी प्राप्त हो सकती है क्योंकि उनमें आत्मविश्वास की कमी नहीं है।

जरुरी नहीं कि पहले प्रयास में ही आपको सफलता मिल जाए। एक छोटी सी चींटी के आत्मा विश्वास से सीख लीजिए, वह दीवार पर जब चढ़ने का प्रयास करती है तो बार बार गिरती है, कभी-कभी तो वह मंजिल के पास पहुंच कर भी गिर जाती है लेकिन वह हार नहीं मानती और चढ़ने का प्रयास करती रहती है फिर एक प्रयास ऐसा होता है कि वह अपनी मंजिल पा ही लेती है। अगर एक बार गिरने के बाद वह चढ़ने का प्रयास छोड़ देती तो क्या उसे कभी अपनी मंजिल मिल पाती…?

आत्मसंशय कम कर देता है आत्मविश्वास

आत्मविश्वास में जो विघ्श का काम करता है वह होता है संदेह। आत्म-विश्वास होने के बाद भी जब संदेह की स्थिति उत्पन्न हो जाती है तो वह असफलता का मुख्य कारण होता है। “मैं यह नहीं कर सकता” जैसे शब्दों को अपनी डिक्शनरी से अलविदा कर दें।

कैसे बढ़ायें आत्मविश्वास

1-: आत्मविश्वास कोई खरीदने की वस्तु नहीं है। यह आपको स्वयं के अंदर पैदा करना होता है बहुत से लोग आपके आसपास ऐसे भी होंगे जिनमें गजब का आत्मविश्वास होता है परन्तु कुछ लोग उसे घमंड या ऑवर कॉन्फिडेंस की संज्ञा देते हैं परंतु सही मायने में वह आत्म विश्वास होता है। जब आपके अंदर किसी कार्य को करने से पहले संशय की स्थिति उत्पन्न ना हो वही आत्म विश्वास है।

2-: प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमताओं के विषय में जानता है सर्वप्रथम ऐसे कार्यों की लिस्ट बनाएं जो आप की छमता के अंदर हैंं, जब आप उन कार्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लेंगे तो आपके अंदर आत्मविश्वास बढ़ेगा जो अन्य कठिन कार्यों को करने के लिए आपके अंदर विश्वास पैदा करेगा।

3-: हमेशा जिंदगी के अच्छे पलों को याद रखें बुरे पलों को नहीं। ऐसे कार्यों को याद करने की कोशिश करें जो आप ने विपरीत परिस्थितियों में या कठिनाई में भी पूर्ण किए हो वह आपका आत्मविश्वास ही था जिसके कारण आप ऐसा कर पाए।

4-: अपने मन में नकारात्मक विचारों को ना आने देंं, महान लोगों की जीवनियाँ पढे़ं जिससे सकारात्मक विचार आपके मन में आएंगे। ऐसे लोगों के विचारों को पढ़ो जिन्होंने अपने दम पर दुनिया में कुछ अलग कर दिखाया जिसके कारण आज पूरी दुनिया उन्हें सलाम करती है।

5-: लगातार प्रयास करें हार न मानेंं अगर आप हार कर बैठ जाएंगे तो आपके जीतने के चांस खत्म हो जाएंगे जबकि जीतता वही है जो प्रयास करना नहीं छोड़ता इसीलिए एक बार असफल होने पर हार न मान लें। जिंदगी का नाम ही संघर्ष है पत्थर घिस घिसकर हीरा बनता है इसीलिए जिंदगी के संघर्ष से डरे नहीं उनका डटकर सामना करें

6-: आप अपने आत्म विश्वास के स्वयं मालिक हैं और स्वयं उसे कंट्रोल करने वाले भी हैं। खुद पर विश्वास रखें और अपनी क्षमताओं को किसी से कम ना आंकें अच्छी बातों को ग्रहण करें और बुरी बातों को अपने जीवन से ऐसे निकाल दें जैसे दूध में से मक्खी।

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