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कविता

काश तू मेरी होती – (कविता) – शशिधर तिवारी ‘ राजकुमार ‘

।।। काश तू मेरी होती ।।।तेरे ख्वाब मेरे होते,  और मेरे ख्वाब में तू होती । तेरे चेहरे की चमक मेरी होती ,  तेरी पायल की छन-छन मेरी होती । तेरे सपनो का मैं राजा होता । और तू मेरे सपनो की रानी होती ।। काश तू मेरी होती ।।

।। समझ बैठे ।। कविता || शशिधर तिवारी ‘ राजकुमार ‘

।। समझ बैठे ।। तेरी सारी ख्वाहिशों को , हम हमारी रहमत समझ बैठे। तेरी होंठो की मुसकुराहट को , तो हम हमारी चाहत समझ बैठे । तेरी ज़ुल्फो की घटाओ को , हम हमारी अमानत समझ बैठे । तेरी नयनों की पलकों को , तो हम हमारी

ना तेरा कसूर है…ना मेरा कसूर – बृजेश यादव

ये जो मदहोशी सी छायी है, तेरे हुस्न का सब कसूर है। ये जो खोया खोया सा मैं रहता हूँ, तेरी बातों का सब कसूर है। ये जो में लड़खड़ाता हुआ सा चलता हूँ, तेरे प्यार के नशे का सब कसूर है। ये जो रात रात भर जागता हूँ, तेरे इश्क़ का सब कसूर…

कुछ कहने को तो है मेरे पास भी…

कुछ कहने को तो है मेरे पास भी… कुछ कहने को तो है मेरे पास भी… पर कोई सुनने वाला नहीं मिला… सोचे शायद कोई अजनबी ही हाले दिल सुन लेग लहरों का शोर इतना बढ़ गया... की खामोशियों से नाता टूटता चला गया... किसी के साथ ऑडी में पेट्रोल…

|| प्रेमी की भक्ति – यक्ष प्रश्नोत्तर।।

|| प्रेमी की भक्ति - यक्ष प्रश्नोत्तर।। भगवान् में गहरी आस्था रखने वाले एक भक्त को प्यार हो जाता है और अपनी प्रेमिका के प्रेम में भाव विह्वल होने के कारण दुनियादारी से सुध-बुध खो देता है । दिन रात उसके दिल-ओ-दिमाग में सिर्फ उसकी…

[कविता] मैंने बहुत याद किया – बृजेश यादव

एक प्रेमी युगल की काफी दिन के बाद बात हुई...तो प्रेमिका ने प्रेमी से पूछा क्या किया इतने दिन??? तो प्रेमी ने अपना हाल किस तरह वयां किया...पढ़िएे मित्रों.... उसने मुझसे पूछा कि क्या किया इतने दिन? मैंने…

चार पंक्तिया

हमने चार पंख्तियाँ क्या लिख दीं लोगों ने कवि बना दिया भरे बजार में हाले-दिल का तमाशा बना दिया घर से निकले तो थे कि तुझे भुला देंगे लिख लिख कर दिल से यादों को मिटा देंगे पर आशिकों के इस बाजार ने तेरी यादॊं को हि बाजारू बना दिया…

बच्पन के दोस्त हुए पुराने

बच्पन के दोस्त हुए पुराने रोज सुबह झूलते हुए स्कूल बस में आंखे मलना दोस्तों के साथ मिलकर क्लास में हुल्लड़ करना शाम को गली क्रिकेट का सिलसिला हुआ अफ़साना बच्पन के दोस्त हुए पुराने.... ....और, E.M.I का चक्कर हुआ चालू A.C. आफ़िस…

सूरज नये साल का

सूरज नये साल का - क्यों लगता है हमें कि, नये साल के सूरज की पहिली किरण, नई आशा लेकर आती है।  क्या उसकी उर्जा, उष्णता, ओैर उजास,  और दिनों की अपेक्षा कुछ ज्यादा होती है?

क्यों जलाते हो मुझे

क्यों जलाते हो मुझे - ‘‘ कमी’ान’’ का रावण, ‘‘ कमी’ान खोरों’’ के हाथों जल गया। जलते जलते  कह गया, मैंने केवल एक अपराध किया था, सीता का हरण किया था। सीता हरण  के बहाने राम के हाथों,
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