मै ही इश्क हूं,मै ही मौहब्बत हूं
मै ही प्यार और मै ही एतबार हूं
मै ही नशा हूं ,मै ही नशेड़ी हूं
मै ही कल हूं और मै ही आज हूं
मै ही घर हूं,मै ही परिवार हूं
मै ही माता और मै ही पिता हूं
मै ही सूरज हूं ,मै ही चांद हूं
मै ही दिन और मै ही शाम हूं
मै ही जीत हूं ,मै ही हार हूं
मै ही कला,मै ही कलाकार हूं
मै ही जीवन हूं मै ही मरण हूं
मै ही सांस और मै ही खास हूं
इक रोज समझना मुझे तुम
मै ही दु:ख और मै ही सुख हूं
मै ही हूं और बस मै ही हूं
क्योकिं मै ही तुम,मै ही आप हूं
मै ही कविता हूं,मै ही किताब हूं
क्योंकि मै ही तुम्हारे साथ हूं
क्योंकि मै ईश्वर हूं ,मै ही खुदा हूं।।
मै ही हूं – अजय कीर्ति – इश्क का राही
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