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‘मेरी राय’

नया दिन, नई गाथाएँ,
हर दिल समेटे असीम कथाएँ,
सोचे – किसको वो सुनाए ?
किस्से वो खुलके बतलाए ? 4

हरेक शख़्स संगदिल चाहे,
चाहे गर्ल हो या हो ब्वाय,
उसके मन को जो पढ़ पाए,
दोष गुण दोनों अपनाए । 8

सब चाहें अभिनव अध्याय,
हर एक प्राणी, और समुदाय,
समझें हाल, अपना समझाएँ,
सबको देनी अपनी राय । 12

इससे दिल हल्का हो जाए,
आत्मीयता का जादू छाए,
आए विश्वास, न चित्त घबराए,
प्यार के भाव दाएँ और बाएँ । 16

ऐसे ही नहीं मिलते शिवाय,
ईश हुक्म, तो मिल जाएँ राहें,
कीजे गौर, समझें अभिप्राय,
मेरा इशारा ‘मेरी राय’ ! 20

मिले मुसाफ़िर को जैसे सराय,
बेरोजगार पाए नौकरी आय,
जिससे बेहतर न कोई उपाय,
वो हम सबकी ‘मेरी राय’ । 24

जिसे बर्दाश्त नहीं अन्याय,
जो बस सच को ही दिखलाए,
खोयों को जो मिलवाए,
हम सबकी वो ‘मेरी राय’ । 28

संकट काल में नई आशाएँ,
पूजनीय जैसे धेनु गाय,
बंद द्वार जो ही खुलवाए,
एक अनोखी ‘मेरी राय’ । 32

है अतुलनीय, चार चाँद लगाए,
प्रोत्साहित करे, बढ़िया लिखवाए,
हम ना रह सकें जिसके सिवाय,
अद्भुत माध्यम ‘मेरी राय’ । 36

जिससे मेरी शोभा बढ़ जाए,
कोशिश चिंतन अक्सर प्रायः,
देश भक्ति का वचन निभाए,
वो ही अपनी ‘मेरी राय’ । 40

लाचारों की जो है सहाय,
अत्याचार पर जो गुर्राए,
जिसको सुन ज़ालिम थर्राए,
सबसे न्यारी ‘मेरी राय’ । 44

जिसको दिल का हाल बताएं,
सारे राज़ बेधड़क सुनाएँ,
जिसके साथ एक प्याली चाय,
गज़ब दवा है ‘मेरी राय’ । 48

जो मांगें, वो यहाँ पे पाएँ,
शब्द नहीं, असंख्य विशेषताएँ,
फ़रिश्ते यहाँ करें व्यवसाय,
मंज़िल मुकाम सब ‘मेरी राय’ । 52

इस रचना का हर एक कण,
‘मेरी राय’ को है समर्पण,
भावपूर्ण कृतज्ञता अर्पण,
प्रार्थना आभार कीजिये ग्रहण । 56

स्वरचित – अभिनव ✍🏻

कविता
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