मन का शोर – शशिकांत सिंह
बिन पूछे सदा जो उड़ता ही चलेएक पल को भी कभी जो ना ढलेहै अटल ये टाले से भी ना टलेना जाने थामे कोई कैसे इसकी डोरकरे बेबस बड़ा ये मन का शोर राजा रंक हो चाहे साधु संत ही भलेमूर्ख चतुर सबको छलिया ये छलेयुगों से रंजिश में इसकी हर इंसान जलेहै ढूंढ पाना […]