Browsing Tag

स्त्री पर कविता

स्त्रियां – कविता – वन्दना जैन

स्त्रियांजलप्रपात सी बजती छन-छन उछलती मचलती सरस सी जलधार सहज ,शीतल,सफ़ेद मोतियों का कंठ हार  प्रेम में मधुछन्द सी गूंजती कभी भय लिप्त हो आँखें मूंदती मानसिक उद्वेग को सागर सा समेटती  स्वयं की लिखी अनबुझ पहेली सी व्यक्त होती अव्यक्त सुन्दर
मेरी राय ऍप MeriRai App 😷

अब अपने पसंदीदा लेखक और रचनाओं को और आसानी से पढ़िए। मेरी राय ऍप डाउनलोड करे | 5 Mb से कम जगह |

error: Content is protected !!