मैंने देखा – कविता – शुभम शर्मा ‘शंख्यधार’

मैंने देखामैंने देखा पंछी को और तिनके तिनके को लानावो धूप के दामन में भी तिनके से नीड़ बनानादेखी है चमक आंख की और चेहरे का मुस्कानावो छूने से तलवे कोमल बच्चों का खिल खिल जाना। मैंने देखा नमी आंख को और देखी सिकन पुरानीमैंने आंख का पानी

रावण – छद्म रचनाये – अभिनव कुमार

काश कि कुछ ऐसा हो जाए,रावण को सद्बुद्धि आ जाए,ख़ुद भी जिए, जीने दे दूजा,ज्ञान को सही दिशा चलाए lअभिनव कुमार रावण को जलाने वालों,तुम क्यों रावण बन गए?अब तो ज़िद छोड़दो अपनी,अच्छे अच्छे बदल गए lअभिनव कुमार

चलो कुछ बातें करते हैं

चलो कुछ बातें करते हैं चलो कुछ बातें करते हैं….चलो कुछ बातें करते हैं…. छोटी सी दुनिया, ख्वाब छोटे हमारेछोटे से मीठे से किस्से हमारेछोटी सी मुस्कान धरते हैं…चलो कुछ बातें करते हैं….. छोटा है जीवन पर बड़े इरादेदूरी है ज्यादा पर

चुनावी मौसम

चुनावी मौसम चुनाव का मौसम आयाजन जन पर देखो छायाहोय सूट बूट या फटा पैजामासबका मन हर्षाया चुनाव का मौसम आयाचुनाव का मौसम आया। देखो इलक्शन बाजों नेवोटों का रुख अपनायाहोय रंक या सेठ सेठानीसबको गले लगाया आज है देखो शेरों नेए सी को

मैं भस्म करूँ क्या रावण को

मैं भस्म करूँ क्या रावण को मैं भस्म करूँ क्या रावण को !मुझमें ख़ुद ढेरों रावण हैं,रावण तो फ़िर भी ज्ञानी था,मेरा तो मैला दामन है ! मारना है तो मारूं बुराइयों को,भर लूँ रिश्तों की खाईयों को,तब ही होगी फ़िर असली विजय,जब दग़ा ना दूँ

जबसे उसके होंठों पे देखा एक छोटा-सा तील

जबसे उसके होंठों पे देखा एक छोटा-सा तील,तबसे उसी पल से हो गया हूँ उसके प्यार में इल,तू भी करदे आज अपने प्यार को रिवील,अब से मैं ही भरूंगा तेरे मोबाइल का बिल, जाके कह दो मम्मी और पापा से,जिनसे मिलती नहीं थी नजर मिल गया हैं "दिल" !!!

गुरु वंदन

गुरु वंदन … गुरु शिष्य …मनोरम दृश्य … मुबारक हो आपको गुरु दिवस …शिष्यों में गए आप हो बस … आपके तप का मोल नहीं है …गुरु बिन शिष्य का रोल नहीं है … नमन है ऐसे रिश्ते को …गुरु नामक फरिश्ते को … गुरु ही देवे अच्छी सीख …संस्कार

सनम बताओ ना !!

सनम बताओ ना !! मैं खुद को अलग नहीं समझता तुम सेतुम समझती हो ऐसा.. तो बताओ नालगता है कि सदियों से नहीं देखा तुम्हेंआज बाल सुखाने फिर छत पे आओ ना कभी आंगन को, तो कभी… छज्जे को निहारूं तेरेएक झलक दे दो… बाज़ार तक घूम आओ नातुमने छोड़

मैं तेरा ही हूँ मगर,
तेरा हो सकता नहीं

मैं तेरा ही हूँ मगर,तेरा हो सकता नहीं !! हाथ मेहंदी का था, जब मेरे हाथ में,नजर झुकी थी मगर, कोई इशारा नहीं !तुम तो सजती हो लेकर के अंगड़ाइयां,बनकर जाओ दुल्हन ये गंवारा नहीं !! मैं तेरा ही हूँ मगर,तेरा हो सकता नहीं !! याद आती है

किंकर्तव्यविमूढ़ – कविता- ईश शाह

जब मैं कुछ नहीं करता हूँतब मुझे दोषी करार दिया जाता है।जब कुछ करूँ तो फिर मेरा क्या हश्र होगा?मैं डरता हूँ नजरों के अंधियारो सेडरता हूँ शब्दों की तलवारो सेसहमा हूँ रिश्तों के बटवारे मेंपला हूँ आँसुओ की आँखों मेंचार आँखे वाले मेरे जीवन के

SARS-CoV-2 संक्रमित व्यक्तियों में कैंसर पैदा करने वाले जीन अपग्रेड हो रहे हैं – डॉक्टर नील…

SARS-CoV-2 संक्रमित व्यक्तियों में कैंसर पैदा करने वाले जीन अपग्रेड हो रहे हैं - डॉक्टर नील रतन अग्रवाल डॉक्टर नील रतन अग्रवाल को ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल रिसर्च अवार्ड OIRA 2022 से सम्मानित किया गया है।पिछले महीने 4th June को विश्व अनुसंधान

किताबें बोलती है

किताबें बोलती है सुना है मैने किताबें है बोलती हैंसबको राह दिखाती हैहर एक विषय में बतलाती है,मीठी बाते ताजा खबरें सामान्य ज्ञान बतलाती हैसबको एक ज्ञान बतलाती है ,हिंदी हो या चाहे अंग्रेजी सबको समान रूप में बतलाती है,सुनो जो भैया इनकी तो

आवाहन :( निर्गुण)

आवाहन :( निर्गुण) ठाढ़ी झरबेरिया वन में होत मिन सार बा कैसे जाऊँ पार पियरा नदिया के पार बा। भोरी मतवारी तन की अब लगि कुआरि हूँ। सगरौँ सिंगार कइली लागेला उघारि हूँ। वहि पार.. पी. घर... यहि पार संसार बा। कैसे जाऊँ

शुभम शर्मा ‘शंख्यधार’ – छद्म रचनाए – 1

वो चंद पल बदल बैठे मेरे ईमान का चेहराखड़े थे साथ सब अपने मगर था धुंध का पहराहटा जब वो समा कातिल हुआ दीदार जन्नत काखड़ा था आसमां पर मैं था सर पर जुर्म का पहराशुभम शर्मा 'शंख्यधार' क्यों काली रातों में ही तुम मिलने आते होक्यों फटे हुए

“छ: वाणी”

"छ: वाणी" छ: बोले कोई सुनो हमारीभाड़ में जाए दुनिया सारी गोल गोल लोग मुझे घुमातेउल्टा लटकाकर नौ बतातेक्रिकेट में मुझको सिक्स बतातेविक्स एड में मुझे दिखाते। घड़ी है जब भी छ: बजाएदोनों सुइयां सीध पे आएंडूब तब झटपट सूरज जाएकाम छोड़

मैं नहाया नहीं पिछले रविवार से

मैं नहाया नहीं पिछले रविवार से भिं भिना कर उड़ गई है मक्खी मेरे कान सेहूं नहाया मैं नहीं पिछले रविवार से।है मल्लिचछी पन नहीं मेरे जी और जान मेंवो तो बस यूं ही निकल गए पिछले कुछ दिन शान में। थी लगाई ये शर्त मैंने अपने यार सेहै

वो नाराज़ हैं!

वो नाराज़ हैं! मैंने खुद ही खुदको तोड़करअपने रास्ते में कांटे बिछाए हैं,मुझे गिला नहीं है गैरों सेमैंने खुदही खुदसे धोखे खाए हैं। वो देखते हैं तिरछी नजर से मुझे इसमें मेरा क्या कसूर,शायद उन्होंने ऐसे ही हमसे मिलने के गुर अपनाए हैं।

खुशहाली

अपने पन की बगिया है ,खुशहाली का द्वारजीवन भर की पूंजी है ,एक सुखी परिवारखुशहाली वह दीप है यारोंहर कोई जलाना चाहता हैखुशहाली वह रंग है यार्रोंहर कोई रमना चाहता हैखुशहाली वह दौर था यारों कागज़ की नावें होती थींमिट्टी के घरौंदे थे ,छप्पर की

घुटनो के दर्द का आयुर्वेदिक घरेलु उपचार

घुटनो के दर्द का आयुर्वेदिक घरेलु उपचार घुटनो के दर्द को लेकर कफी लोग परशान रहते हैं। आजकल लगभाग हर घर में कोई ना कोई है बिमारी से परशान है। आईये जानते है आयुर्वेद और घरेलु तरीके से कैसे लाखो लोगो को घुटने के दर्द में राहत मिली है।
मेरी राय ऍप MeriRai App 😷

अब अपने पसंदीदा लेखक और रचनाओं को और आसानी से पढ़िए। मेरी राय ऍप डाउनलोड करे | 5 Mb से कम जगह |

error: Content is protected !!