हम – कविता

हम चाय के शौकीन हमधुन में अपनी लीन हमजब लगेगी अपनी किस्मतहोंगे तब रंगीन हम छा रहा है बादलों काहल्का सा पहरा यहांहो चला सबकुछ धुआं साअब है आती नींद कम।

सीता माता को ना छूना रावण की “महानता” नहीं मज़बूरी थी |

सीता माता को ना छूना रावण की "महानता" नहीं मज़बूरी थी | हर साल हम दशहरा पर रावण के "महान" होने की गाथा सुनते है | और सोशल मीडिया पर तो रावण के "संस्कारो" की तारीफ करते लोग नहीं थकते | इसमें सबसे बड़ी बात बोली जाती है की रावण ने सीता

दहलीज़ – कविता – शिल्पी प्रसाद

कुछ किताबें उन मांओं पर लिखी जानी चाहिए,जिनके दिन चुल्हें के धुएं की धुंध बनकर रह गए।एक पन्ना भी मन का न नसीब आया जिनके।। एक-आधा गीत उनके द्वंद्व की भी गढ़ी जानी चाहिए,महिमा मय नहीं, खांस-खांस खाट पर निढाल हुई जो पट गई।दम निकलते वक्त

अभिनव कुमार छद्म रचनाएँ – पर्यावरण

जीव जन्तु,जैसे शिव शंभू,बचाते पर्यावरण,ना किन्तु परन्तु ।अभिनव कुमार दो हाथ जब मिल जाएं,पशु, पेड़ फ़िर खिलखिलाएं,वातावरण जीवित हो जाए,आओ धरा बचाएं । अभिनव कुमार गागर में साग़र,सबकुछ ही उजागर,इन्सां, पेड़-पौधे, जानवर,मिलकर बनाएं जीवंत

और जब मोहब्बत का रुख़ बदलेगा..

और जब मोहब्बत कारुख़ बदलेगाअपनी दिखावट सेअपने होने भर केअहसास मेंतब,अपनी कहानी केसबसे प्रभावशाली औरमुख्य किरदार आपस्वयं होंगे। ©शिल्पी

बस अभी अभी तो

बस अभी अभी तो…. अभी सूरज ढलाअभी चांद आ गयारात आंखों में थीमैं बोतल में आ गया अभी थे तारे खिलेअभी प्रभात आ गयाअभी बस आंख खुली किजुवां पे उसका नाम आ गया शुभम शर्मा 'शंख्यधार'

विरह – कविता -शिल्पी प्रसाद

तुम जान लो,मैं जानती हूंये बातों की लड़ीजो स्वाभाविक आजमेरी जीवन कीशैली हो गई है,यह आदत एक रोज़हवा में घुलपिघल जाएगीऔर, पीछे रह जाएगीमेरी पीड़ा,तुम बिन मिलेविरह मिल जाएगा मुझे। ~शिल्पी

दादी कहानी सुनाओ ना !!

दादी कहानी सुनाओ ना !! दादी मां दादी मां कहानी एक सुनाओराजा रानी घोड़ा गाड़ी की बातें बतलाओआवाज तुम्हारी है मीठी मन को मेरे भाती हैहर बार नई कहानी दादी आप कहां से लाती हैं? हल्के से मुस्काके बोलीं दादी प्यार जाता के बोलींचिल्लम

कलम – (कविता) अभिनव कुमार

कलम ✍🏻 छोटी बहुत ये दिखती है, प्रबल मग़र ये लिखती है,बड़ों बड़ों को पार लगादे, इससे उनकी खिजती है । ये हालात लिखती है, शीशे जैसी दिखती है,जैसी बाहर वैसी अंदर, सच से इसकी निभती है । उसूलों पर ही चलती है, बिल्कुल भी ना

डॉ. नील रतन अग्रवाल ने ‘द इंटरनेशनल ब्रेक-थ्रू रिसर्च अवार्ड’ प्राप्त किया।

डॉ. नील रतन अग्रवाल ने अपने शोध "एन् एट्टेम्प्ट् टो  ऱेवेर्से बिओ-एन्जिनेअर् आस्त्मा बाई होम्योपैथिक टिंचर्स " ("An Attempt to Reverse Bio-engineer Asthma By Homeopathic Tinctures")  के लिए 'द इंटरनेशनल ब्रेक-थ्रू रिसर्च अवार्ड' (‘The

सुना है फिर चुनावी बादल छाने लगे हैं।।

सुना है फिर चुनावी बादल छाने लगे हैं।।---------- सारे नेता आजकल गाँव में आने लगे हैं।सुना है फिर चुनावी बादल छाने लगे हैं। गड्ढों वाली सड़कों में टल्ले चिपकाने लगे हैं।दीवारों को साफ करके चूना लगाने लगे हैं।हाथ में झाड़ू पकड़ कर फ़ोटो

मैं सही या ग़लत ?

मैं सही या ग़लत ? मैं ग़लत, मैं ग़लत,मैं ग़लत, मैं ही ग़लत । कहां करूं बोलो दस्तख़त !अब पार हुई है हर हद । कल तक थी तुम्हें मेरी लत,आज हूँ ख़ामख़ा कमबख़्त । मैं हूँ झूठ, तुम ही हो सच,नहीं चाहता मैं जाना बच । तुम थे ढाल, तुम मेरे

मैं नई दुनिया निर्माण करूंगा

मैं नई दुनिया निर्माण करूंगा नहीं चाहिए कोई विरासत ना धर्म और न कोई आफतचारों तरफ मचा कोलाहल मैं इसमें शांति बहाल करूंगामैं नई दुनिया निर्माण करूंगा…. बच्चा बच्चा होता सच्चा जो पका नहीं वो होता कच्चाक्या है जीवन क्या उद्देश्य मैं इसकी

रवि के पास – शुभम शर्मा

रवि के पास… (रवि अर्थात सूर्य) सर्द सासें ओला बनके हैं जहन में बह रहींमन की गर्मी बाजुओं में बौखलाहट कर रहीरुक चुकी बहती पवन अब तो बस हिमपात हैले चलो मुझको वहां तुम जो रवि के पास है….. शांत मन है जोश उत्तम हृदय में आघात हैहै मजे में

कान्हा…धरा पर जल्दी आना

कान्हा…धरा पर जल्दी आना द्वापर युग,अवतरित युगपुरूष,कान्हा जन्म,माह भाद्रपद ।। ८ देवकी से उत्पन्न,अवतार विष्णु भगवन,यशोदा माँ ने पाला,गोकुल नंद लाला ।। १३ अद्भुत बाल्यकाल,शक्तियाँ अपार,राक्षसों का वध,सटीक उद्देश्य पर ।। १० अदम्य

असमंजस – अब बस …

असमंजस - अब बस … तुम भी सही,मैं भी सही,ग़लत बात फ़िर,किसने कही ? दिल की बात,दिल ही में रही,मैं हूँ वही,मैं था वही । ताने बाने बस,बुनते रहे,सिर्फ कमियां ही,चुनते रहे । रही सही कसर,गलतफहमियां खा गईं,जाने कैसी !रिश्तेदारी निभा गईं ।

फ़र्क देखिए (1) बनाम (2) में ज़मीन आसमान का

फ़र्क देखिए (1) बनाम (2) में ज़मीन आसमान का :- (1) "चलो आज मुस्कुराते हैं" - तालिबानी गुनगुनाते हैं,दहशत बड़ी फैलाते हैं, निर्दोष मारे जाते हैं,औरतों पे ज़ुल्म ढाते हैं, आबरू भी ढहाते हैं,वे कल को भूल जाते हैं, बस

अफ़ग़ानिस्तान तालिबान से कहे …

अफ़ग़ानिस्तान तालिबान से कहे … सोचता था मैं पहले कि तुम,मेरे रक्षक, मुझको घेरे हो,आज मग़र अहसास हुआ कि,तुम तो निकले सौतेले हो । दहशत, दर्द, ज़ुल्म, आतंक,ना जाने क्या क्या दे रहे हो,पाल पोस तुम्हें बड़ा किया,तुम बने मेरे ही लुटेरे हो ।

कैसे कह दूं कि तुम नहीं मेरे हो !

कैसे कह दूं कि तुम नहीं मेरे हो ! … कैसे कह दूं कि तुम नहीं मेरे हो !तुम मेरे नहीं, पर मेरे हो,ज़रूरी नहीं कि बन्धन हों, फ़ेरे हों,तन जुदा हैं, पर मन में तो ठहरे हो,रूहें तृप्त जब रिश्ते गहरे हों ।

जय हिंद …

जय हिंद … सैनिक है बैठा सीमा पर,सिर्फ़ तेरी मेरी ख़ातिर,मैं और तू तो हैं घर पर,वो जैसे एक मुसाफ़िर । अपनी तो जान बचाने की,ना उसको कोई है परवाह,एक मैं और तू ही लड़ते हैं,क्या मंदिर, मस्जिद, दरगाह ! सबकुछ तो उसने त्यागा है,देशभक्ति ना
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