जीवन को दिशा नई दें

|| जीवन को दिशा नई दें || जीवन को जो सहज बनातीसृष्टि की अनुपम काया, मन को सहर्ष गति फिर देतीप्रकृति की अविरल छाया |जगत का सारा भार लिए दाय जैसे कोई निभा रहे, वायु, वृक्ष, ये धरा हमारी बिगुल हैं जैसे बजा रहे |पंछी

नारी तू भव की आधारशिला – कविता

|| नारी तू भव की आधारशिला || शोभा कि नदी, सगुणों से सजी प्रेम-करुण की तू सीमा, स्तुति तेरी किन शब्दों में जग में न तेरी कोई उपमा || दर्पण सा मन, निरूपण-निरूपण शामक भी, हर किरदार में तू, नारी तू भव की आधारशिला दूजी न

प्रेम बहे झरने सा तेरा

प्रेम बहे झरने सा तेरा || तन में सिहरन, सांसों में गतिमन भी व्याकुल, नव-जन्में सा,ऐसा अदभुत प्रेम तुम्हाराह्रदय में बसता, पहली बारिश सा || भाव तुम्हारे, मन के अन्तस परजैसे रश्मि हिम के पर्वत पर,प्रेम बहे झरने सा तेरामन मोहता, कविता
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