प्रेम बहे झरने सा तेरा

प्रेम बहे झरने सा तेरा || तन में सिहरन, सांसों में गतिमन भी व्याकुल, नव-जन्में सा,ऐसा अदभुत प्रेम तुम्हाराह्रदय में बसता, पहली बारिश सा || भाव तुम्हारे, मन के अन्तस परजैसे रश्मि हिम के पर्वत पर,प्रेम बहे झरने सा तेरामन मोहता, कविता
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