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कविता

काश तू कभी मिली ना होती

काश तू कभी मिली ना होती तो अच्छा होता 

दोस्तों के बहकावे मे ना आया होता तो अच्छा होता!!


तुमने नजाने मुझसे क्यू बड़ाई नजदीकिया,

अगर छोड़ना ही था तो ठीक थी ये दूरियाँ!

मैंने तो कभी तुझसे प्यार ना किया,

तेरे हां कहने से मैंने मैंने इक़रार किया!

काश तू कभी मिली ना होती तो अच्छा होता,

दोस्तों के बहकावे मे ना आया होता तो अच्छा होता!!
उस दिन कॉलेज मे तुम्हे दिल ने पहली दफा देखा,

काश उस दिन हम दिल ही ना लाये होते तो अच्छा होता!

क्या कहु अब  उस दिन तो बस भी छूट गयी थी,

काश उस दिन रिक्शे की हड़ताल हुयी होती तो अच्छा होता!

काश तू कभी मिली ना होती तो अच्छा होता,

दोस्तों के बहकावे मे ना आया होता तो अच्छा होता!!

शशिधर तिवारी "राजकुमार" एक सिविल इंजीनियर विद्यार्थी हैं जो मुंबई से पढ़ रहे हैं .वे इस नए दौर के कवि हैं जो समाज चल रहे अभी के माहौल और कॉलेज की गतविधियों पर कविता लिखना पसंद करते हैं. प्यार, मोहब्बत, दोस्ती ऐसे सभी मुद्दे पर अक्शर कविता लिखना…

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