अजय महिया छद्म रचनाएँ – 6

ईक चाली तू चल,चलत-चलत चली जाई
निस्स्वार्थ के पथ पर ,परकाज कर मुस्काई ।।

रोला छंद ,अनुप्रास अंलकार

अजय महिया

जीने‌‌ के लिए मुझे अरमान दे दे ।
दिल की कलम से पैगाम दे दे ।।
नशा केवल शराब मे नहीं ए-हसीना ।
इसके लिए तो तेरा इशारा काफी‌‌ है ।।

अजय महिया नोहर, हनुमानगढ़
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हर वक्त ईशारे नहीं होते,ईश्क मे मशवरे नहीं होते।
जो है मेरा,वो तुम से है,दिल में अंगारे नहीं होते ।।

अजय महिया नोहर, हनुमानगढ़

हर वक्त ईशारे नहीं होते,ईश्क मे मशवरे नहीं होते।
जो है मेरा,वो तुम से है,दिल की आग में अंगारे नहीं होते ।।

अजय महिया नोहर, हनुमानगढ़

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