आदमी (कविता)

आदमी कहीं खो गया है आभासी दुनिया में आदमीझुंठलाने लगा है अपनी वास्तविकता को आदमीपरहित को भूलकर स्वहित में लगा है आदमीमीठा बोलकर ,पीठ पर वार करता है आदमीचलता जा रहा है सुबह शाम आदमीपता नहीं किस मंजिल पर पहुँच रहा है आदमीअपनी तरक्की की परवाह

जीवन – कविता

जीवनरोने से क्या हासिल होगाजीवन ढलती शाम नहीं हैदर्द उसी तन को डसता हैमन जिसका निष्काम नहीं है ।। यह मेरा है ,वह तेरा हैयह इसका है ,वह उसका हैतोड़ फोड़ ,बाँटा -बाँटी का ,गलत इरादा किसका हैकर ले अपनी पहचान सहीतू मानव है ,यह जान सहीदानवता

माँ – कविता (प्रभात पाण्डेय)

माँ के जीवन की सब साँसे बच्चों के ही हित होती हैं चोट लगे जब बालक के तन को आँखें तो माँ की रोती हैं ख़ुशी में हमारी ,वो खुश हो जाती है दुःख में हमारे ,वो आंसू बहाती है निभाएं न निभाएं हम अपना वो फ़र्ज़ निभाती है ऐसे

कोरोना त्रासदी (अपनों को खोने का गम )

कोरोना त्रासदी (अपनों को खोने का गम )अंधेरे में डूबा है यादों का गुलशनकहीं टूट जाता है जैसे कोई दर्पणकई दर्द सीने में अब जग रहे हैंहमारे अपने ,हमसे बिछड़ रहे हैंन जाने ये कैसी हवा बह रही हैज़िन्दगी भी थोड़ी सहम सी गई हैहवाओं में आजकल ,कुछ

कलियुग – कविता

कलियुग सब खेल विधाता रचता हैस्वीकार नहीं मन करता हैबड़ों बड़ों का रक्षक कलियुगयहां लूट पाट सब चलता है || जो जितना अधिक महकता हैउतना ही मसला जाता हैचाहे जितना भी ज्ञानी हो ,कंचन पाकर पगला जाता हैचोरी ही रोजगार है जहाँअच्छा बिन मेहनत के

वीवो आईपीएल २०२१

सिक्सर कौन लगायेगा कौन नाम बनायेगा किसके सिर पर सजेगा ताज यह अब तय हो जायेगा सही गिरेगी गुगली या स्विच हिट लग जायेगा बाउंसर गुजरेगी कानों से या हुक शॉट खेला जायेगा क्या गेंद

होली – कविता

होली फिर मादकता की अंगड़ाई लेकर ,होली का पर्व आया हैआम्र कुंज से मुखर मुकुल का ,सौरभ पवन स्वयं लाया है || भूमि पर ज्योति की बांसुरी बजानेफूल के गांव में पांखुरी खिलानेहर किरन के अधर पर ,सरस तान यह लाया हैफिर मादकता की अंगड़ाई लेकर

गांधी के सपनों का ,उड़ता नित्य उपहास है

गांधी के सपनों का ,उड़ता नित्य उपहास है वही पालकी देश कीजनता वही कहार हैलोकतन्त्र के नाम परबदले सिर्फ सवार हैंराज है सिर्फ अंधेरों काउजालों को वनवास हैयहाँ तो गांधी के सपनों काउड़ता नित्य उपहास है || महफ़िल है इन्सानों की ,निर्णायक

समय का पहिया

समय का पहिया मानो तो मोती ,अनमोल है समय नहीं तो मिट्टी के मोल है समय कभी पाषाण सी कठोरता सा है समय कभी एकान्त नीरसता सा है समय समय किसी को नहीं छोड़ता किसी के आंसुओं से नहीं पिघलता समय का पहिया चलता है चरैवेति क्रम

कविता : वो जश्न कोई मना न सके

दोस्ती वो निभा न सकेआग दिल की बुझा न सकेमेरे जज्बातों से खेलकर भीवो जश्न कोई मना न सके || कभी खामोश रहता हूँकभी मैं खुल कर मिलता हूँजमाना जो भी अब समझेज़माने की परवाहअब मैं न करता हूँवो पल कैसे भूल सकता हूँबुझाई थी नयनों की प्यास जब

सम्मान तिरंगा

यह तिरंगा तो ,हमारी आन बान हैयह दुनिया में रखता ,अजब शान हैयह राष्ट्र का ईमान है ,गर्व और सम्मान हैस्वतन्त्रता और अस्मिता की ,यह एक पहचान हैक्रान्तिकारियों की गर्जन हुंकार हैविभिन्नता में एकता की मिसाल हैएकता सम्प्रभुता का कराता ज्ञान

हौसला (कविता)

हौसला निशीथ में व्योम का विस्तार हैहौसला विहान में बाल रवि का भास हैनाउम्मीदी में है हौसला खिलती हुई एक कलीहौसला ही है कुसमय में सुसमय की इकफलीहौसला ही है श्रृंगार जीवन काहौसला ही भगवान हैहौसले की ताकत इस दुनियां मेंसचमुच बड़ी महान है ||

आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं

आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं सुखद हो जीवन हम सबका क्लेश पीड़ा दूर हो जाए स्वप्न हों साकार सभी के हर्ष से भरपूर हो जाएं मिलन के सुरों से बजे बांसुरी ये धरती हरी भरी हो जाए हों प्रेम से रंजीत सभी ऐसा कुछ करके दिखलायें

कविता : मोहब्बत {प्रभात पाण्डेय }

कविता : मोहब्बत नदी की बहती धारा है मोहब्बत सुदूर आकाश का ,एक सितारा है मोहब्बत सागर की गहराई सी है मोहब्बत निर्जन वनों की तन्हाई सी है मोहब्बत ख्वाहिशों की महफिलों का ,ठहरा पल है मोहब्बत शाख पर अरमानों के गुल है मोहब्बत

कविता : यह कैसा धुआँ है

कविता : यह कैसा धुआँ है लरजती लौ चरागों की यही संदेश देती है अर्पण चाहत बन जाये तो मन अभिलाषी होता है बदलते चेहरे की फितरत से क्यों हैरान है कैमरा जग में कोई नहीं ऐसा जो न गुमराह होता है भरोसा उगता ढलता है हर

जिस प्यार पे हमको बड़ा नाज था

कविता : जिस प्यार पे हमको बड़ा नाज था … जिस प्यार पे हमको बड़ा नाज था क्या पता था वो अन्दर से कमजोर है जिन वादों पे हमको बड़ा नाज था क्या पता था कि डोर उसकी कमजोर है || करूँ किसकी याद ,जो तसल्ली मिले रात के बाद आती

वो सारे जज्बात बंट गए

वो सारे जज्बात बंट गए गिरी इमारत कौन मर गया टूट गया पुल जाने कौन तर गया हक़ मार कर किसी का ये बताओ कौन बन गया जिहादी विचारों से ईश्वर कैसे खुश हो गया धर्म परिवर्तन करने से ये बताओ किसे क्या मिल गया जाति
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