बे’वजह ,असमय बोलने मे तेरा फायदा ही क्या है,
अपनी कमजोरियों को दिखाने से फायदा ही क्या है ।।
सबको मालूम यहां स्वार्थी लोग निवास करने लगे हैं
फिर तेरे स्वार्थी या निस्वार्थी बनने से फायदा ही क्या है ||
अजय माहिया
फायदा ही क्या है
Related Posts
मैं एक हिन्दू हूँ,
मैं एक हिन्दू हूँ, मैं एक हिन्दू हूँ,रावी हूँ और सिंधू हूँ,महत्वपूर्ण एक बिन्दु…
युवा का अब आगाज हो
युवा का अब आगाज हो युवा का अब आगाज हो,एक नया अन्दाज़ हो,सिंह की आवाज हो,हर युवा…
मुझे पता ही नहीं चला
उन सभी को जिन्होंनेअपने परिवार के लिए21 से 60 वर्ष कमाने मेंव्यस्त रहे। आज…
होली – कविता
होली फिर मादकता की अंगड़ाई लेकर ,होली का पर्व आया हैआम्र कुंज से मुखर मुकुल का…
माँ – कविता (प्रभात पाण्डेय)
माँ के जीवन की सब साँसे बच्चों के ही हित होती हैं चोट लगे जब बालक के तन को आँखें…
अभिनव कुमार – छद्म रचनाएँ – 9
थक गया हूं लड़ - लड़कर हालातों से,दुआ करो कि अब ये आघात आखिरी हो। आँखें हैं कि…
|| प्रेमी की भक्ति – यक्ष प्रश्नोत्तर।।
|| प्रेमी की भक्ति - यक्ष प्रश्नोत्तर।। भगवान् में गहरी आस्था रखने वाले एक भक्त…
आज़ादी की आपबीती
आज़ादी की आपबीती 'आज़ादी' अब ७३ की हो गई,अपनों की राह तकते हुए थककर सो…
G20 – तारीफ़ तो बनती है
नमस्कार🙏🏻G20 दिल्ली शिखर सम्मेलन 2023 की सफ़लता अब जग ज़ाहिर है…
मैं सही या ग़लत ?
मैं सही या ग़लत ? मैं ग़लत, मैं ग़लत,मैं ग़लत, मैं ही ग़लत । कहां करूं बोलो दस्तख़त…
ना तेरा कसूर है…ना मेरा कसूर – बृजेश यादव
ये जो मदहोशी सी छायी है, तेरे हुस्न का सब कसूर है। ये जो खोया खोया सा मैं रहता…
मज़दूर नहीं, वो है मजबूर
मज़दूर नहीं, वो है मजबूर मज़दूर यानि श्रमिक,परिश्रम का प्रतीक,मेहनत का…
जिंदगी
कभी हास्य बद बनती है जिंदगीकभी शोक ग्रस्त बनती है जिंदगीकभी खेल खेलती है…
उस अवतार को बधाई
एक ऐसी शक्ति,करे विश्व भक्ति ।एक ऐसा विश्वास,जगाए सदैव आस । एक ऐसा संकल्प,दृढ़ता…
फिर भी सब हरा है
शब-ए-घोर अंधियारे में ,आज करूणा-कंठ भरे हैंकठोर हृदय मृदुल हुआ,सब आँखों में नीर…
दादी कहानी सुनाओ ना !!
दादी कहानी सुनाओ ना !! दादी मां दादी मां कहानी एक सुनाओराजा रानी घोड़ा गाड़ी की…
ऐसा न हो कि चाँद मैं बन जाऊं !
अरे तुम कहाँ थेतुमसे मिलने आया था मैंअरे तुम कहाँ थेफिर से खिलने आया था मैंना…
और जब मोहब्बत का रुख़ बदलेगा..
और जब मोहब्बत कारुख़ बदलेगाअपनी दिखावट सेअपने होने भर केअहसास मेंतब,अपनी कहानी…
अभिनव कुमार – छद्म रचनाएँ – 5
मुझे ज़िन्दगी तुझसे शिकायतें बहुत हैं,तुझे दी मैंने हरपल हिदायतें भी बहुत हैं,आज…
इंसान नहीं, आप ईश्वर – वैद्य, चिकित्सक, डॉक्टर
इंसान नहीं, आप ईश्वर… स्वीकार कीजिए कृतज्ञता,देशभक्ति की आप पटकथा । दिल से…





































