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कविता

कुछ शेर ‘उन’ के नाम

कुछ शेर ‘उन’ के नाम

लहरों के यूं ही किनारे खुल गए
सुना है उनको बागी हमारे मिल गए,
ये उफनती हुई लहरें खामोश भी होंगी
हमको भी कुछ नए सहारे मिल गए।

वो अब नहीं पूछा करते हैं हमें अक्सर अपनी बातों में
कई मुद्दत के लिखे खत उन्हें हमारे मिल गए।
हमने भी फिर उनको फुरसत से परेसां किया
हमें भी याद करने के नए बहाने मिल गए।

सुबह की पहली किरण के कमल पे पड़ते ही
चारों ओर सारे प्याले खुल गए,
एक बार ही बोए थे हमने बीज कुछ चुनकर
दो बार की बरसात से पौधों में ढल गए।

©शुभम शर्मा 'शंख्यधार' शुभम शर्मा का जन्म जिला शाहजहांपुर यू ०प्र० के एक छोटे से कस्बे खुटार में हुआ। ये उन स्वतंत्र लेखकों में से हैं जो सिर्फ अपने मनोरंजन के लिए तथा अपने खाली समय में अपने अंदर झांककर उसका सदुपयोग करने के लिए लेखन करते हैं। आप…

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