पुनि ब्रम्हाण्ड राम अवतारा, देखेहूँ बाल विनोद अपारा

भारतीय जन मानस के रोम रोम में राम व्याप्त है। राम चरित्र व्यापक और अनंत है। राम ब्रम्हा, विष्णु तथा महेश का दिव्यतम रुप है। राम, ज्ञान भक्ति, मर्यादा,कर्म, का पवित्रतम संगम है। राम मन, मष्तिष्क, आत्मा का कल्याणकारी पावन पवित्र प्रवाह हैं।

32 वर्षों से ओलम्पिक पदक को तरसती भारतीय हॉकी

भारतीय हाॅकी टीम ने 1980 में मास्को में हुये ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीता था । उसके बाद हुये छः ओलम्पिक जिनमें कि भारतीय टीम ने भाग लिया, एक भी पदक नहीं जीत सकी। हाॅकी भारत का रा”ट्रीय खेल है, या यूॅ क

ओलम्पिक में भारतीय हॉकी का सफर

1886 से एथेंस (ग्रीस) से प्रारंभ हुये ओलम्पिक खेलों में 1886,1900 पेरिस,1904 सेंट लुईस, तथा 1906 एथेंस में हाॅकी को ‘ाामिल नहीं किया गया था। 29 अक्टूबर से 31 अक्टूबर1908 तक लंदन में पहिली बार  हाॅकी के खेल को ‘ाामिल किया गया।ं 1912 एवं 1916…

आतंकवादी देश से क्रिकेट रिश्ते क्यो?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड हमे’ाा अपनी कार गुंजारियों के कारण हमे’ाा सुर्खियों में रहा है। पिछले दिनों जब पाकस्तिानी अधिकारियों का दल वार्ता करने हेतु भारत आया था तब किसी पत्रकार ने भारतीय विदे’ा मंत्री से भारत के विदे’ामंत्री से यह प्र’न…

वक्त आ गया है लोकतंत्र की मर्यादा को बचाने का

  वि’व के सबसे बडे लोकतांत्रिक  दे’ा में आज लोकतंत्र आहत है, आचरण अमर्यादित है,राजनीति दि’ााहीन है। पिछले दिनों रा”ट्रपति के चुनाव में जिस प्रकार राजनीति वस्त्रविहीन होकर सडकों पर उतरी है वो इस बात की ओर इ’ाारा करती हैे कि, अब समय आ गया है…

भारतीय क्रिकेट अर्श और हॉकी फर्श पर

भारतीय हाॅकी के स्र्वणिम अध्याय औेर इसे रा”ट्रीय खेल का दर्जा प्राप्त होने के कारण हाॅकी आज भी हम भारतीयों के लिये रा”ट्रीय सम्मान का प्र’न बना हुआ है। क्रिकेट में जीत के बाबजूद वो आत्मीयता और जो’ा नहीं आ पाया है जो कि, भारतीय हाॅकी में…

राजनीति का सिलेंडर, और सिलेंडर की राजनीति

                 वर्तमान समय भारतीय लोकतंत्र के लिये बेहद नाजुक समय है। राजनैतिक मर्यादाऐं अपनी सभी सीमाये   ेंलांघती नजर आ रही है। राजनैतिक हित दे’ा हित से कहीं उपर होता जा रहा है। इस उपापोह में मुख्य मुददे कही खोते जा रहे है। इन…

हर अंधेरी सुरंग का अंत सुखद रोशनी होता है।

  विचार कर्म के प्रासाद की नींव है। विचार का प्रभाव अदभुद् है। यह विचार ही है जो अर्जुन को गाण्डीव उठाने के लिये प्रेरित करता है, ओैर नरेन्द्र को विवेकानंद बना देता हेंै। यह विचार ही हैे जो किसी भी आदमी को अपराधी बनने के लिये प्रेरित करता…

सत्ता रुपी पशु की अन्तरात्मा नहीं होती

कहा जाता हैे कि सत्ता, सता- सता कर मिलती है। इसीलिये जब यह मिलती हेै तो इसे भोगने वाले निरंकु’ा या यूॅ कहें कि, मदान्ध हो जाते है। एसा हमे’ाा ही होता है। बस फर्क इतना हैे कि, सत्ता  को भोगने वाले चेहरे बदल जाते हेैं। इसका गरुर इतना अधिक…

संस्कार

आज लाला दीनदयाल जी के यहाँ सुबह से ही बहुत चहल पहल थी। हो भी क्यों न, उनकी इकलौती  बिटिया को देखने लडके वाले जो आ रहे थे। लालाजी शहर के प्रसिद्ध उद्योगपति थे  उनके 5 कारख़ाने थे ओर अधिकांश माल विदेशों में निर्यात होता था।

कथनी और करनी

मोहिनी देवी की ख्याति शहर में समाज सुधारक, कन्या भू्रण हत्या की प्रबल विरोधी तथा धार्मिक महिला के रुप में थी। शहर में दुर्गा पूजा पर्व मनाया जा रहा था। सुबह सुबह उन्होंनें लान में चाय पीते हुये अपने दैनिक कार्यक्रमों की डायरी देखी। 1.    …

अमर्यादित आचरण और भ्रष्टाचार से गर्भवती होती ईमानदारी

आज हम देश का 66 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे है। कहा जाता है कि, सामान्यतः पचास वर्”ा से अधिक होने पर जनन औेर प्रजनन क्षमता न्यून हो जाती है, लेकिन 66 साल के इस बुढाते देश में  भ्रष्टाचार कामदेव के रुप में अवतरित हुआ है औेर उसने इस देश की…

मानवाधिकार एक बार फिर, सलाखों के पीछे

मानवाधिकार एक बार फिर, सलाखों के पीछे उमा शंकर मेहता देश की फौलादी महिला और विश्व की सबसे अधिक लंबी भूख हडताल करने वाली महिला ईरोम चानू शर्मीला को विगत 22 अगस्त को एक बार फिर न्यायिक हिरासत…

भ्रष्टाचार की कब्र में दफन भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन

अभी पिछले दिनों टीम अन्ना ने अपना अनशन यह कहते हुये खत्म कर दिया था कि, अब वे देश को राजनैतिक विकल्प देगें और तभी जन लोकपाल बन पायेगा। लेकिन अन्ना ने अचानक अपने ब्लाग में टीम अन्ना की कोर कमेटी को भंग करने की घोषणा करके सबको चैंका दिया  है।

‘‘ तंत्र ’’ से नाराज ‘‘गण’’ – गणतंत्र दिवस पर विशेष

                                  भारतीय संविधान निर्माताओं ने जब संविधान का निर्माण किया था तो उनके मन में ऐ ऐसे संविधान की कल्पना थी जिसमें तंत्र ‘ाासन और गण जनता मिलजुल कर दे’ा के निर्माण में मिल जुल कर  े कार्य करें, लेकिन वर्तमान …

सूरज नये साल का

सूरज नये साल का - क्यों लगता है हमें कि, नये साल के सूरज की पहिली किरण, नई आशा लेकर आती है।  क्या उसकी उर्जा, उष्णता, ओैर उजास,  और दिनों की अपेक्षा कुछ ज्यादा होती है?

क्यों जलाते हो मुझे

क्यों जलाते हो मुझे - ‘‘ कमी’ान’’ का रावण, ‘‘ कमी’ान खोरों’’ के हाथों जल गया। जलते जलते  कह गया, मैंने केवल एक अपराध किया था, सीता का हरण किया था। सीता हरण  के बहाने राम के हाथों,

गाँधी जयंती

 गाँधी के बारे में कहा जाता है कि, गाँधी आज भी प्रासंगिक है। गाँधी एक इंसान नहीं गाँधी एक भावना है,कामना है, मनोकामना हैे। गाँधी चरखे की आत्मा है,गाँधी स्वतत्रता की परिकल्पना है, गाँधी रि’तों कर प्रगाढता है,गाँधी सादगी का प्रतीक है, गाँधी…
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