सत्ता रुपी पशु की अन्तरात्मा नहीं होती

कहा जाता हैे कि सत्ता, सता- सता कर मिलती है। इसीलिये जब यह मिलती हेै तो इसे भोगने वाले निरंकु’ा या यूॅ कहें कि, मदान्ध हो जाते है। एसा हमे’ाा ही होता है। बस फर्क इतना हैे कि, सत्ता  को भोगने वाले चेहरे बदल जाते हेैं। इसका गरुर इतना अधिक…

संस्कार

आज लाला दीनदयाल जी के यहाँ सुबह से ही बहुत चहल पहल थी। हो भी क्यों न, उनकी इकलौती  बिटिया को देखने लडके वाले जो आ रहे थे। लालाजी शहर के प्रसिद्ध उद्योगपति थे  उनके 5 कारख़ाने थे ओर अधिकांश माल विदेशों में निर्यात होता था।

कथनी और करनी

मोहिनी देवी की ख्याति शहर में समाज सुधारक, कन्या भू्रण हत्या की प्रबल विरोधी तथा धार्मिक महिला के रुप में थी। शहर में दुर्गा पूजा पर्व मनाया जा रहा था। सुबह सुबह उन्होंनें लान में चाय पीते हुये अपने दैनिक कार्यक्रमों की डायरी देखी। 1.    …

अमर्यादित आचरण और भ्रष्टाचार से गर्भवती होती ईमानदारी

आज हम देश का 66 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे है। कहा जाता है कि, सामान्यतः पचास वर्”ा से अधिक होने पर जनन औेर प्रजनन क्षमता न्यून हो जाती है, लेकिन 66 साल के इस बुढाते देश में  भ्रष्टाचार कामदेव के रुप में अवतरित हुआ है औेर उसने इस देश की…

मानवाधिकार एक बार फिर, सलाखों के पीछे

मानवाधिकार एक बार फिर, सलाखों के पीछे उमा शंकर मेहता देश की फौलादी महिला और विश्व की सबसे अधिक लंबी भूख हडताल करने वाली महिला ईरोम चानू शर्मीला को विगत 22 अगस्त को एक बार फिर न्यायिक हिरासत…

भ्रष्टाचार की कब्र में दफन भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन

अभी पिछले दिनों टीम अन्ना ने अपना अनशन यह कहते हुये खत्म कर दिया था कि, अब वे देश को राजनैतिक विकल्प देगें और तभी जन लोकपाल बन पायेगा। लेकिन अन्ना ने अचानक अपने ब्लाग में टीम अन्ना की कोर कमेटी को भंग करने की घोषणा करके सबको चैंका दिया  है।

‘‘ तंत्र ’’ से नाराज ‘‘गण’’ – गणतंत्र दिवस पर विशेष

                                  भारतीय संविधान निर्माताओं ने जब संविधान का निर्माण किया था तो उनके मन में ऐ ऐसे संविधान की कल्पना थी जिसमें तंत्र ‘ाासन और गण जनता मिलजुल कर दे’ा के निर्माण में मिल जुल कर  े कार्य करें, लेकिन वर्तमान …

सूरज नये साल का

सूरज नये साल का - क्यों लगता है हमें कि, नये साल के सूरज की पहिली किरण, नई आशा लेकर आती है।  क्या उसकी उर्जा, उष्णता, ओैर उजास,  और दिनों की अपेक्षा कुछ ज्यादा होती है?

क्यों जलाते हो मुझे

क्यों जलाते हो मुझे - ‘‘ कमी’ान’’ का रावण, ‘‘ कमी’ान खोरों’’ के हाथों जल गया। जलते जलते  कह गया, मैंने केवल एक अपराध किया था, सीता का हरण किया था। सीता हरण  के बहाने राम के हाथों,

गाँधी जयंती

 गाँधी के बारे में कहा जाता है कि, गाँधी आज भी प्रासंगिक है। गाँधी एक इंसान नहीं गाँधी एक भावना है,कामना है, मनोकामना हैे। गाँधी चरखे की आत्मा है,गाँधी स्वतत्रता की परिकल्पना है, गाँधी रि’तों कर प्रगाढता है,गाँधी सादगी का प्रतीक है, गाँधी…

लान टेनिस खिलाडियों का विवाद औेर ओलम्पिक

‘‘क्या देश के मान सम्मान से बढ कर है, निजी स्वार्थ ’’ भारतीय खेल इतिहास में यह पहिला अवसर हैे कि, खिलाडियों ने देश के मान सम्मान को ताक पर रख कर अपने  आपसी विवाद,दुर्भावना,और व्यक्तिगत अंह को तरहीज दी है और एक दूसरे के साथ खेलने से मना कर…

पेट्रोल की कीमतें और राजनैतिक मंच पर अभिनय

पिछले दिनों पेट्रोल की कीमतों में  बेतहा’ाा वृद्धि हुर्ई्र। स्वाभाविक हैे सभी राजनैतिक दलों का जनता के प्रति प्रेम उभर कर आ गया। सभी दल इस वृद्धि को  अपने अपने नफा नुकसान के आईने में तोलने लगें। इस पेट्ोल वृद्धि पर सबसे ज्यादा चिल्लपों मचाई…

श्रेष्ठ चरित्र अभिनेता थे, ए.के. हंगल

पिछले दिनों भारतीय सिनेमा ने बहुत कुछ खोया है। पहिले दारासिंह फिर भारतीय सिनेमा जगत के पहिले सुपर स्टार राजेश खन्ना और अब श्रेष्ठतम चरित्र अभिनेता ए.के. हंगल नहीं रहें। उन्हें 25 अगस्त की देर रात्रि को मुम्बई के सान्ताकू्रज के आशा पारिख…

‘‘आचार्य श्री जिनकान्तिसागरसूरि’’ अनुभूति, अभिव्यक्ति

आचारांग सूत्र की एक पंक्ति हैः- पणया वीरा महाविहिं(1@20) अर्थात् वीर पुरु”ा ही महापथ पर गतिमान हो सकते है। त्यागपथ महापथ है, संयम मार्ग महामार्ग है। जो पथ आत्मा को परमात्मा तक पहुॅचा दे, वह महापथ। जो मार्ग आत्मा को अनावृत कर उसके…
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