गांधी की हत्या एक विचार धारा की हत्या थी

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गांधी की हत्या एक विचार धारा की हत्या थी

गांधी के विषय में आईन्सटीन का यह कथन सबसे महत्वपूर्ण है कि, आने वाली पीढियॉ इस बात पर विश्वास नहीं कर पाएंगी कि, धरती पर महात्मा गांधी जैसा कोई जीव भी हुआ था जिसके चमत्कार को भूलना बहुत कठिन है।वास्तव में गांधी एक चमत्कारिक व्यक्तित्व थे।

इस वर्ष उनका 150 वां जयन्ती वर्ष मनाया जा रहा है। उनके होने, और आज भी प्रांसगिक होन पर निरन्तर बहस, विचार गोष्ठियों और विचार- विमर्श का आयोजन हो रहा है।

बौद्ध धर्म गुरु सामदोंग रिनपोछे मानते है कि,विश्व में बढती हथियारों की होड के बीच गांधी का अहिंसा और सत्याग्रह का विचार संबसे प्रांसगिक है। सुप्रसिद्ध विचारक सुधीन्द्र कुलकर्णी का मानना है कि, मशीनीकरण के नाम पर गांधी के विचारों पर बहुत भ्रम फैलाया गया है, वे मशीनीकरण के विरोधी नहीं थे अपितु वे हर उस मशीन का स्वागत करते थे, जिससे लोगों के कष्ट कम हो लेकिन बेरोजगारी न बढे। उनकी आजादी की परिकल्पना बहुआयामी थी, एसा नर्मदाबचाओ आन्दोलन की संयोजक मेघा पाटकर का मानना था।

फिर प्रश्न यह उपस्थित होता है कि, एसी विचारधारा रखने वाले, जादुई व्यक्तित्व के धनी महात्मा गांधी की हत्या क्यों कर दी गई। वे भारत विभाजन के कभी पक्षधर नहीं रहे, वे ग्रामस्वराज के माध्यम से रामराज्य की परिकल्पना मन में लिये हुये थे और उस पर कार्य भी कर रहे थे, राम नाम उनकी मानसिक और शारीरिक उर्जा का स्त्रोत था। भारत की स्वतंत्रता के लिये उनका प्रयास, संघर्ष और परिश्रम किसी से छिपा नहीं है। फिर एसा क्या हुआ कि, उनकी हत्या कर दी गई। क्योंकि, गांधी स्वॅय एक विचारधारा थे।

इस प्रकार उनकी हत्या एक विचार धारा की हत्या थी। गांधी का हत्यरार किस विचार धारा,संगठन, राजनैतिक दल से जुडा था इस पर लिखना, और कहना विद्वेषता को पुर्नजन्म देनेके स्थान पर यह चिन्तन आवश्यक है कि, ‘ गांधी विचार धारा’ से किसे तकलीफ हो रही थी। क्या यह तकलीफ का सबब था कि, वे समाज के पीडित शोषित वर्ग के उत्थान के लिये कार्य कर रहे थे, या वे धार्मिक समभाव के पक्षधर थे? प्रश्न यह है कि, गांधी के विचार और कार्य प्रणाली से कोई असहमत हो सकता हे लेकिन केवल इसलिये उन्हें मौत के घाट उतार देना एक एतिहासिक भूल, कायरता और एतिहासिंक अपराध था। जैसे वे हत्यारा और उससे जुडा संगठन मानते हैं कि, केवल उनकी विचार धारा ही सर्वश्रेष्ठ है। मत भिन्नता क्या अपराध, कायरता और द्वेषता की जननी है। इस हत्या से तो केवल यही निकल कर सामने आया है।

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