मुझे मेरे १५ लाख़ दे दो मोदीजी

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मुझे मेरे १५ लाख़ दे दो मोदीजी

मैं बोखलाया हुआ व्यक्ति हुँ | २०१४ के चुनाव में मैं आपकी पार्टी के खिलाफ था ।
मैं आपके समर्थको का उपहास करता था । उन्हें भक्त कहकर खूब मजे लेता था ।
मैं बचपन से ही बुद्धिजीवियों को पढ़ता आया हूँ , सुनता आया हूँ, देखता आया हूँ । मेरे हिसाब से सत्ता किन्ही विशेष वर्गों की बपौती है । आप उसमे “फिट” नहीं बैठते ।

इस देश की सत्ता उन लोगो के लिए है जो कैम्ब्रिज, ऑक्सफ़ोर्ड जैसी संस्थान में पढ़े है । या कम से कम ऐसा बताते है । आप छोटे मोटे कॉलेज से पढ़े हुए है । क्या पढ़े है और कितना इसका सर्टिफिकेट श्री श्री केजरीवाल जी भी नहीं दे पा रहे है । क्या आपको देश का प्रधानमंत्री होना चाहिए?

वैसे खुद को देश का प्रधान सेवक बता कर आपने मुझे थोड़ी दिलासा जरूर दे दी है । आपको प्रधानमंत्री साहब बोल कर में आहात जरूर होता । पर में आपको बता चूका हूँ की में बुद्धिजीवी हूँ इसलिए जहां आप काबिल-ऐ-तारीफ है वहा में तारीफ भी करूँगा |
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आपके आने के बाद देश में असहिष्णुता किस कदर बढ़ी है इसका अंदाज़ इस बात से लगाइये की जिन लोगो को में कल तक भक्त या संघी कहकर चिढ़ाता था आज वे मुझे उदारवादी या बुद्धिजीवी कह कर मुझ पर हँस रहे है । क्या किसी ऑक्सफ़ोर्ड या कैम्ब्रिज में पढ़े नेता के समर्थक को ये कहा जाना चाहिए? मैं इतना बड़ा बुद्धिजीवी हूँ की मेट्रिक पास प्रेमचंद से ज्यादा होशियार , समझदार और लायक उनको समझता हूँ जिन्होंने प्रेमचंद पर पीएचडी की है । प्रेमचंद को मेउ तवज्जो देना उचित नहीं समझता । एहि बात आप पर लागु होती है

पिछले ६० साल से पढ़े लिखे नेता लोग स्वच्छ भारत , साक्षरता, गरीबी उन्मूलन , शान्ति की बात करते आये है । कितना अच्छा लगता था सुनकर । आपको पुरे दो साल हो गए इन पर काम करते हुए । क्या हुआ? आपने इन स्कीम का पहले तो नाम बदला | और ऊपर से इनपर काम भी कर रहे है । यह सिर्फ नाम कीअदला बदली नहीं है , यह बताता है की आपके अंदर बदले की भावना किस प्रकार गढ़ी हुई है । हमारे पुराने नेता और उनके रिश्तेदार अगर बाद में सत्ता में आये तो क्या करेंगे ? 70 साल से में गरीबी हटाओ का नारा सुनता आया हु, अगर जीवित रहा तो अगले 70 साल भी सुनना है वह भी एक विशेष प्रकार के लोगो के मूह से । आपकी ख़तरनाक राजनीती मुझे डरा रही है ।

एक पूर्व प्रधानमंत्री के कपडे धुलाई के लिए पेरिस जाया करते थे । गज़ब । अद्भुत । इसे कहते है स्वच्छता अभियान । उनके परपोते को लगता है की आप 15 लाख का सूट पहनते हैं| चूँकि वे बड़े घराने से है और मैं बुद्धिजीवी तो मुझे उनकी बात एकदम सही लगती है। वैसे भी कई पत्रकारों ने इस बात की पुष्टि की है । इनमे से कुछ वही पत्रकार है जिन्होंने कुछ साल पहले टू-जी घोटाले में जीरो लॉस होने की पुष्टि की थी| ये लोग गलत कैसे हो सकते है ? ये पत्रकार बड़े बड़े अवार्ड होल्डर है और इनमे से कुछ तो आपके राज में आई असहिष्णुता को देख कर अवार्ड वापसी भी कर चुके है । वैसे आपको तो पता हे होगा की ये अवार्ड इन्हें बुधिजिवियो की सरकार ने दिए थे ।

आपके भक्तो से में परेशान हूँ । किसी एक को जब मैंने बताया की कैसे आप १५ लाख का सूट पहनकर धोखा दे रहे है तो वह तुरंत इन्टरनेट पर बैठ गया । कुछ देर बाद आ कर बोला की भारत में काफी अच्छा सूट ३०००० के लगभग आ जाता है और विदेश में ५-६ लाख तक का। और तो और उसने अमेज़न की वेबसाइट दिखाई amazon.in पर ३०००० में सबसे मेहेंगा और amazon.com (अमेरिका ) में ६ लाख के सूट सबसे मेहेंगे मिले । साथ में बस यह कह गया की “कस्टमाइज्ड” जैकेट मेहेंगे होते है और पप्पू पप्पू चिल्ला कर हंसने लगा । अब बताइए टीवी की स्क्रीन को काली नहीं कर लेना चाहिए? अवार्ड वापस न किये जाये? जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में लगने वाले भारत विरोधी नारों का समर्थन न किया जाये? आपने अम्बानी के रिलायंस जिओ की मॉडलिंग इसी लिए कि क्योंकि आप अपने भक्तों से मेरा मज़ाक उड़वाना चाहते थे । आपकी इस साजिश का भंडाफोड़ कर दिया मैंने । बुध्धिजीवी जो ठहरा ।

जब कुछ क्रन्तिकारी नेताओ को सुना तो पहली बार पता चला की हमारे टैक्स का पैसा उद्योगपतियों को दिया जाता है | यह आपकी सरकार में ही हो रहा है | अभी तक की सरकारें टैक्स के पैसों से सड़क, विद्यालय, अस्पताल आदि बनाती थी पर एक महान नेता ने आपको एक उद्योगपति के एजेंट का सर्टिफिकेट दिया था तो इस से साबित हो जाता है की आप मेरे टैक्स का पैसा उद्योगपति को दे रहे है| मुझे भारत यूरोप और अमेरिका जैसा चाहिए पर टैक्स क्यों ज्यादा दू? अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों में 50% तक टैक्स लग जाता है पर मुझे इस से क्या ? मुझे आप पूरी सब्सिडी भी दे और देश को विकसित भी करे|

आपने इंटरेस्ट कम किया याने बैंक से मिलने वाला ब्याज| जो मेरी बचत का हिस्सा था| आपने मेरा पेट काट लिया| ये पैसा भी सीधे किसी उद्योगपति को जा रहा होगा | दुनिया में अधिकतर देश 2 – 5 प्रतिशत ब्याज देते है | मुझे अमेरिका यूरोप जैसा काम चाहिए पर इंटरेस्ट कम नहीं होना चाहिए |

बची कुची कसर आपने प्रोविडेंट फण्ड का इंटरेस्ट कम कर के पूरी कर ली| आप मुझसे बदला क्यों ले रहे है? आप एक बात अच्छी तरह से समझ ले – मुझे सब्सिडी चाहिए, ज्यादा इंटरेस्ट भी चाहिए, मुझसे कोई कर न लिया जाये या कर कम कटे पर देश में विकास दिखना चाहिए|
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आप से पहले की सरकार देखे । उनके पास क्या दिमाग था । खुद को गरीब बताओ, जनता को गरीब बताओ और विश्व बैंक से लोन ले लो । यही पैसा हमें बांटो । अद्भुत अविश्वनीय अल्कल्पनीय । अब इस लोन का बदले हम विश्व की नज़र में गरीब और कमज़ोर हुए भी तो क्या? जनता को खुश रखा जाता था। वोट बैंक ऐसे ही नहीं बनता ।

स्विट्ज़रलैंड में एक जनमत संग्रह कराया गया । इसके जरिये यह फैसला होना था की नागरिको की बुनियादी आये कितनी होनी चाहिए । अगर जनमत संग्रह के पक्ष में ज्यादा वोट आते तो सरकार बिना किसी शर्त के कम से कम 2500 स्विस फ्रैंक ( १ लाख 73 हज़ार रुपए लगभग) हर महीने हर वयस्क को देगी स्विट्ज़रलैंड के लोगों ने 1लाख 73 हज़ार की बेसिक इन्कम ठुकरा दी पर में तो सरकारी बैंक में मुफ्त में मिलने वाले डिपाजिट फॉर्म भी नहीं छोड़ता (एक बार बैंक जाता हूँ तो ५-१० “एक्स्ट्रा” फॉर्म ले कर ही आता हूँ )| गैस सब्सिडी को तो भूल ही जाये |

आपकी सरकार में घोटाले नहीं मिल रहे । यह भी आपकी साजिश है । पहले की सरकारें देखे । बोफोर्स आया या २-जी , कोयला निकाला या मिनरल्स , सस्ती कीमतों पर जनता को मिल गया । तब मुझे किसानों की आत्महत्या नहीं दिखती थी | में ये नहीं सोचता था की अगर ये घोटाले ना होते तो वह पैसा इन किसानों के काम आ जाता । ईमानदारी से टैक्स भरने वाले , बैंक में सेविंग्स करने वाले और प्रोविडेंट फण्ड की मदद से रिटायरमेंट प्लान बनाने वालो पर भार नहीं डाला जाता ।

प्रधानमंत्री बनते ही दुनिया घूमने लगे | ६ दिनों में ४ देशो की यात्रा करते है | सुना है फ्लाइट में ही नींद ले लेते है । भाईसाहब सरकारी यात्रा मतलब १ देश ९ दिन । आइस क्रीम खाते , बोटिंग करते , रिसोर्ट में रहते – एक ही जगह ९ दिन । तब कही टूर सफल होता । कभी गाँव में किसी किसान के यहाँ खाना खा कर फोटो खिंचवाई है? खिंचवा लेते तो आपको गरीब चिंतक की उपाधि दे दी जाती|

आप और आपके ढोंगी राष्ट्रवादियो की फ़ौज भारत माता की जय का उद्गोष करके बहुत खुश होते हो | चे ग्वेरा को पढ़ा है ? हम पढ़े लिखे लोग चे ग्वेरा को पढ़ते है । आपका पुराने खयालातों वाला चाणक्य आपको मुबारक | आप विदेशी धरती पर भारत माता की जय बोल लेते है| पीछे पीछे आपके भक्त । कितना अजीब है । भारत माता के गुणगान करना गलत ही है । गुणगान तो सिर्फ एक परिवार का होना चाहिए । भारत उनके “आईडिया ऑफ़ इंडिया ” से चला है और उनके ही “आईडिया ऑफ़ इंडिया ” से चलना चाहिए ।

छोटे व्यापारियों से आपकी दुश्मनी देखते ही बनती है । सोना खरीदने वालो के लिए आपने १ प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाया अगर कॅश से पैसा दिया जा रहा है । भक्त कह रहे थे की काला धन को रोकने में ये कितना मददगार होता । यह कोई रहस्यपूर्ण बात नहीं है की “काला धन” वाले ज्यादातर कॅश में खरीद फरोख्त करते है । आम आदमी जो ईमानदारी से टैक्स दे रहा है उसके लिए कॅश , चेक , क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड सब एक जैसा है | मुझे काला धन वापस चाहिए पर कॅश ट्रांसक्शन से मुझे कोई आपत्ति नहीं ।

जैसे मीरा के दिल में कृष्ण बसे थे मेरे दिल में वह १५ लाख बस गए है जिसकी बात आपने की थी । में आपके हर मुद्दे को १५ लाख से जोड़ सकता हूँ| और जोड़ भी रहा हूँ । काला धन कितना है उसको समझने के लिए आपने जो गणित बताया उसको मैंने दिल पर ले लिया । १६ मई २०१४ से सुबह शाम दिन रात मैं बस वही चाहता हूँ| मेरे नेताओ की और विचारो की जो २०१४ में हार हुई है उसका खामियाजा तो आपको भुगतना ही पड़ेगा । मेरे अंदर की जो कुंढा है, बोखलाहट है, चिड़ है , अपमान की भावनाये है , खीज है , जलन है , उसके आगे में अँधा हो गया हूँ ।

मुझे मेरे 15 लाख दे दो मोदीजी
मुझे मेरे 15 लाख दे दो मोदीजी

मन एव मनुष्याणां कारणं बन्ध मोक्षयोः

नोट: व्यंग को व्यंग की तरह ले । सुनने में आ रहा है की हर हवा में उड़ती हुई बात को दिल पर लेने और उसका ट्विटर पर मूहतोड़ जवाब देने वालो का “इन्टॉलरेंट” मोदीजी के इशारो पर जुबान का ऑपरेशन करवाया जा रहा है ।

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