कोरोना में होली – कविता

कैसे खेलें हम ये रंग बिरंगी होलीजब दो गज दूर खड़ी हो हमजोलीलिए गुलाल हम गये छुने उसके गालरोक दिया उसने दुर से ही किया बबालबोली वो इस बार छूना नहीं,मजबुरी हैंकोरोना काल मैं दो गज दूरी जरूरी हैपूरे साल के इंतजार के बाद मौका आयाजालिम कोरोना

दल बदलने की रेलम पेल – कमल श्रीमाली

राजनीति में कभी इधर कभी उधर हो रहे हैंचुनाव आये हैं नेता इधर उधर हो रहे हैं कैसे सिद्धांत, कैसी पार्टी, कैसी नैतिकताइधर नहीं मिला टिकट तो उधर हो रहे हैं पता ही नहीं चल रहा है कौन किस पार्टी में हैसुबह किधर,दोपहर इधर,शाम उधर हो रहे
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