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धर्म

17 अगस्त तुलसी जयन्ती पर विशेष

माॅगत तुलसीदास कर जोरे, बसहूॅ राम सिय मानस मोरे’’ रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास का प्रधान ग्रंथ है जो एक प्रबंध काव्य है।ग्रन्थ के प्रारंभ में तुलसी ने कथा के प्रबन्ध की सविस्तार प्रस्तावना…

ढोंगी ‘ईश्वर’ के पाखंडी भक्त हैं ‘हम’

'धर्म हमारे मस्तिष्क में ठोके गये एक किल (खूँटा) के माफिक है, जिसने हमारे सोचने,समझने, सवाल पूछने एवं तर्क करने कि क्षमता को अपने में बाँध लेने का काम किया है । इंसान का विचारशील होना तभी सम्भव है, जब उसका मस्तिष्क स्वतंत्र विचरण कि अवस्था…

भारतीय संस्कृति में पितृ पक्ष (श्राद्ध) का महत्व

भारत में पित्रपक्ष की शुरुआत 5 सितंबर से हो गई है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार पितृ पक्ष की अवधि 15 दिनों तक रहेगी, पितृ पक्ष में अधिकतर हिंदू अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं। श्राद्ध में मुख्य रूप से अपने पूर्वजों को याद किया जाता है…

क्या तीन तलाक खत्म होने से महिलाओं को मिलेगा समान अधिकार

समाज में महिलाएं विवाह के बाद पूरी तरह पति पर निर्भर रहती है ऐसी में वह पति की बदतमीजियों को बर्दास्त करके भी उसके साथ रहती हैं, जब तक महिलाएं आर्थिक रुप से आत्म निर्भर नहीं होगी तब तक तीन तलाक खत्म होने से मुस्लिम महिलाओं को ना के बराबर…

विश्वास जब बन जाए अंधविश्वास

विश्वास जब बन जाए अंधविश्वास भारत में 75% साक्षरता दर होने के बावजूद भी अंधविश्वास से प्रताड़ना के मामले में आए दिन सुर्खियों में छाए रहते हैं। 21वीं शताब्दी में जहां एक तरफ मानव ने कितनी तरक्की कर ली है कि वह दूसरे ग्रह पर दुनिया बसाने…

एक अनुसंधान : ‘ईश्वर’ क्या हैं?

एक अनुसंधान : 'ईश्वर' क्या हैं? जब भी 'ईश्वर' शब्द हमारे जेहन में आता हैं, मस्तिष्क स्वतः धार्मिक चिंतन में प्रवेश करने को अग्रसर हो जाता हैं| वास्तव में अगर हम हजारों वर्षों के मानवीय इतिहास पर एक गहरी नजर डाल सकें, एक स्पष्ट प्रमाणिक…

आपका ‘धर्म’ क्या है?

आपका ‘धर्म’ क्या है? 'धर्म' मानव इतिहास के किसी भी कालखंड में सर्वाधिक चर्चित विषय रहा हैं | 'धर्म' को लेकर विभिन्न महामानवों ने अपने विचार रखें हैं, और उनके अनुयायी आज भी उस वैचारिक यात्रा में गतिशील हैं | मूलतः 'धर्म' शब्द का…

श्रद्धा और प्रेम का मिलन है अमरनाथ यात्रा

श्रद्धा और प्रेम का मिलन है अमरनाथ यात्रा त्रिदेवों में सर्वश्रेष्ठ देवों के देव महादेव जो सृष्टि के संघारकर्ता कहे जाते हैं अपने शीघ्र क्रोधित होने वाले स्वभाव से जाने जाते हैं जब शिव क्रोधित होते है तो शिव के विकराल रुप और तीसरी दृष्टि…

मन और तन की शांति का साधन है- योग

योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "यजु" से हुई है जिसका अर्थ है- जोड़ना।। योग उस पद्धति को कहते हैं जो व्यक्ति को अपने आप में बांधें रखता है। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि को स्वयं में समेटे हुए योग ऊर्जा का…

पद और गुण की वंदना – णमोकार मंत्र

यह णमोकार नमस्कार महामंत्र जैन धर्म की सभी परमपराओं द्वारा एकमत से मान्य है। ्रप्रायः मानव किसी एक महापुरुश को लक्ष्य बनाकर अपनी समस्त भक्ति व श्रद्धा का स्त्रोत उन पर उडेल देता है, परन्तु इस महामंत्र की विषेशता है कि, इसमें किसी…

वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली गुरु- विवेकानंद

          स्वामी विवकानंद, धर्म औेर दर्शन की पुण्य भूमि भारत के वेदान्त, और आध्यात्म के प्रभावशाली गुरु थे।           1893 में उन्होने शिकागो में विविध धर्म महासभा में सनातन धर्म  का प्रतिनिधित्व किया और अपने गरिमामय, और ओजस्वी उद्बोधन से…

पुनि ब्रम्हाण्ड राम अवतारा, देखेहूँ बाल विनोद अपारा

भारतीय जन मानस के रोम रोम में राम व्याप्त है। राम चरित्र व्यापक और अनंत है। राम ब्रम्हा, विष्णु तथा महेश का दिव्यतम रुप है। राम, ज्ञान भक्ति, मर्यादा,कर्म, का पवित्रतम संगम है। राम मन, मष्तिष्क, आत्मा का कल्याणकारी पावन पवित्र प्रवाह हैं।

सत्ता रुपी पशु की अन्तरात्मा नहीं होती

कहा जाता हैे कि सत्ता, सता- सता कर मिलती है। इसीलिये जब यह मिलती हेै तो इसे भोगने वाले निरंकु’ा या यूॅ कहें कि, मदान्ध हो जाते है। एसा हमे’ाा ही होता है। बस फर्क इतना हैे कि, सत्ता  को भोगने वाले चेहरे बदल जाते हेैं। इसका गरुर इतना अधिक…

‘‘आचार्य श्री जिनकान्तिसागरसूरि’’ अनुभूति, अभिव्यक्ति

आचारांग सूत्र की एक पंक्ति हैः- पणया वीरा महाविहिं(1@20) अर्थात् वीर पुरु”ा ही महापथ पर गतिमान हो सकते है। त्यागपथ महापथ है, संयम मार्ग महामार्ग है। जो पथ आत्मा को परमात्मा तक पहुॅचा दे, वह महापथ। जो मार्ग आत्मा को अनावृत कर उसके…
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