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लेख

हमें भगवान क्यों नहीं मिलते ?

हमें भगवान क्यों नहीं मिलते ? आज प्रतिभाशाली और कलात्मक लोगों द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास से भरी दुनिया है। इस दुनिया में विभिन्न प्रकार के लोग रहते हैं। उन सभी को, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रचनात्मक ईश्वर

अब बहुत हुआ – स्वदेशी अपनाओ

अब बहुत हुआ 130 करोड़ भारतीयों तक पहुंचाये. कोरोना महामारी ने बहुत नुकसान कर दिया मानव जाति का. CoronaStat.org वेबसाइट के अनुसार से अप्रैल 27 तक दुनिया में 30 लाख से ज्यादा लोगों संक्रमित हो चुके हैं. 2 लाख से अधिक मौतों. पर ये

खाड़ी देशों में तेल के दामों में लगातार गिरावट और भारत की अर्थव्यवस्था

खाड़ी देशों में तेल के दामों में लगातार गिरावट और भारत की अर्थव्यवस्था मेरे मन में पिछले कई दिनों से कुछ विचार अपने आप को इस बाहरी बहुमुखी प्रतिभावानो से परिपूर्ण इस दुनिया के सामने प्रस्तुत होने को व्याकुल हो रहा था । अतः आज मैं अपने

पृथ्वी दिवस – अनीश कुमार

आज 22 अप्रैल पृथ्वी🌏 दिवस के उपलक्ष्य में मैं अपने विचार आप लोगों के साथ साझा करने जा रहा हूं| "पृथ्वी" इस शब्द का उच्चारण हम मानव जाति जितनी सरलता और सुगमता से करने में सक्षम हैं उतने ही अबोध, असमर्थ और अपरिपक्व इसके महत्व को

ख़तरे में है वसुंधरा!

बचपन से आज तक दादी-नानी की कहानियो में सुनते आए है कि यह धरती हमारी माँ स्वरूपा है। हमें ये संस्कार मिले है कि सुबह उठते ही सबसे पहले इस धरती को वंदन करो। यही हमारे भारतीय संस्कार रहे है। किंतु अफ़सोस है कि हमने आज तक इन बातों पर अमल नहीं

इसके पहले की हो जाएँ -बैक टू लाइफ़ !

इसके पहले की हो जाएँ -बैक टू लाइफ़ ! साइकल ,जब एक अनजाने घाट पर बिन पैडल मारे सरकने लगती है, तो मेहनत ज़रूर कम हो जाती है , लेकिन एक वैकल्पिक ख़तरे का एहसास , उस आरामदेही सफ़र का मज़ा नहीं लेने देता ।ठीक उसी तरह जब जीवन के सफ़र में

स्वदेशी और विदेशी उत्पादों की सूची

अमेरीका ने भारत का बिज़नेस का विशेष दर्जा हटा दिया | चीन ने वापस आतंकियों को बचाया है | कई देशो में नौकरी करने वाले विदेशियों की छुट्टी कर दी गयी है | भारत में हम बस फेसबुक और ट्विटर पर राष्ट्रवाद करते जा रहे है | स्वदेशी बनाना बहुत जरुरी

इस महिला दिवस , गृहणियों को क्यू नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़ना चाहिए 

इस महिला दिवस , गृहणियों को क्यू नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़ना चाहिए नेटवर्क मार्केटिंग या मल्टी-लेवल-मार्केटिंग (MLM) एक ऐसा माध्यम है जिसमें मार्केटिंग कंपनियां अपने उत्पादों के बेचने के लिए नेटवर्क बनाते है |ये एक ऐसा

साहित्यिक जीवटता, और जिजीविषा की अदम्य मशाल, कृष्णा सोबती

पिछले दिनों हिन्दी साहित्य में अपनी लेखकीय जीवटता, उल्लास और जिजीविषा के लिये ख्यात कृष्णा सोबती नहीं रहीं। कृष्णा जी एक पूरी परम्परा का विस्तार थी जो समय के साथ विभिन्न पात्रों, रंगों और घटनाओं में घटती गई। कृष्णा जी के ही शब्दों में

गांधी की हत्या एक विचार धारा की हत्या थी

गांधी की हत्या एक विचार धारा की हत्या थी गांधी के विषय में आईन्सटीन का यह कथन सबसे महत्वपूर्ण है कि, आने वाली पीढियॉ इस बात पर विश्वास नहीं कर पाएंगी कि, धरती पर महात्मा गांधी जैसा कोई जीव भी हुआ था जिसके चमत्कार को भूलना बहुत

ढोंगी ‘ईश्वर’ के पाखंडी भक्त हैं ‘हम’

'धर्म हमारे मस्तिष्क में ठोके गये एक किल (खूँटा) के माफिक है, जिसने हमारे सोचने,समझने, सवाल पूछने एवं तर्क करने कि क्षमता को अपने में बाँध लेने का काम किया है । इंसान का विचारशील होना तभी सम्भव है, जब उसका मस्तिष्क स्वतंत्र विचरण कि अवस्था…

क्रिप्टो करेंसी क्या है यह कैसे काम करता है

क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी करेंसी है जो कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनाई गई होती है। क्रिप्टो करेंसी एक स्वतंत्र मुद्रा होती है इस मुद्रा का कोई मालिक नहीं होता, हम यह कह सकते हैं कि क्रिप्टो करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में नहीं होती। रुपया,…

आत्म विश्वास से जीती जा सकती है दुनिया

आत्मविश्वास शब्द की व्युत्पत्ति दो शब्दों से मिलकर हुई है आत्मा और विश्वास। आत्मा का मतलब होता है स्वयं से और विश्वास यानी भरोसा। कोई भी कार्य करते समय स्वयं पर यह भरोसा होना कि वह उस कार्य को कर सकता है वही आत्मविश्वास होता है। आत्मा…

इन आदतों को खुद से करें अलविदा

आदतें बदलना थोड़ा मुश्किल अवश्य होता है लेकिन नामुमकिन नहीं होता। लोगों में कुछ आदतें ऐसी होती हैं जिनकी वजह से आपसी संबंध और सामाजिक संबंध खराब होने लगते हैं। इसीलिए खुद के अंदर छुपी ऐसी आदतों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। चलिए जानते…

शिक्षा प्रदाता शिक्षक, समाज का मूर्तिकार होता है

इतिहास इस बात का साक्षी है कि, प्रत्येक समय में महान दार्शनिक ही महान शिक्षा शास्त्री ही हुये है। प्लूटो, सुकरात,लॉक कमेनियस,रुसो, फेबिल, गॉधी टेगौर,अरविन्द घोष, स्वामी विवेकानंद आदि। इन सभी दार्शनिकों ने अपने अपने दर्शन को क्रियात्मक और…

बंदऊँ राम लखन वैदेही

मानस की काव्यसरिता का उद्गमस्थल कवि का वह ह्रदयरुपी मानसरोवर है जिसमें राम का यश रुपी जल भरा हुआ है। यही रामचरितमानस रुपी नदी लोक में आज भी जन जन के मध्य अबाध गति से प्रवाहित हो रही है। महाकाव्य के लिये जिस गुरुत्व,गांभीर्य और महत्ता की…

क्या तीन तलाक खत्म होने से महिलाओं को मिलेगा समान अधिकार

समाज में महिलाएं विवाह के बाद पूरी तरह पति पर निर्भर रहती है ऐसी में वह पति की बदतमीजियों को बर्दास्त करके भी उसके साथ रहती हैं, जब तक महिलाएं आर्थिक रुप से आत्म निर्भर नहीं होगी तब तक तीन तलाक खत्म होने से मुस्लिम महिलाओं को ना के बराबर…

भूखमरी-: करें गरीबों का पेट भरने की पहल

हम भारत के नागरिक हैं और प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है कि देश में रहते हुए उसकी बुनियादी जरूरतें पूरी हो सके। यहां तक कि कम से कम दो वक्त की रोटी तो उन्हें नसीब हो सकें। शायद आपको जानकर हैरानी होगी हमारे देश में 20 करोड़ लोग भूखे रहते…

नशा: एक भयानक तबाही

नशा: एक भयानक तबाही नशा समाज में फैली है ऐसी बुराई है जिससे मनुष्य का जीवन समय से पहले ही मौत के मुंह में चला जाता है। नशे के लिए शराब, गांजा, चरस, भांग,अफीम, हंडिया, गुटखा, तंबाकू, धूम्रपान, सिगरेट आदि घातक पदार्थों का उपयोग किया जाता…

एक दिन बुढापा आपको भी आएगा

एक दिन बुढापा आपको भी आएगा वृद्धावस्था जीवन का वह सच है जिसके आगोश में हर किसी को आना है। भारत में वृद्धों की संख्या लगातार बढ़ रही है और घर वालों द्वारा की गई उनकी अवहेलना के आंकड़े भी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2050 तक दुनिया भर…
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