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देश

मोदी नहीं तो…. कौन ? – के.कुमार

मोदी नहीं तो.... कौन ? - के.कुमार ये सही हैं कि हमारी लोकतान्त्रिक व्यवस्था ऐसी हैं, जहाँ प्रधानमंत्री पद ही मुख्य आकर्षण का केंद्र होता हैं, बावजूद इसके भारतीय राजनीति पर जो प्रभाव पिछले २-३ वर्षों में श्री नरेंद्र मोदी का देखने को…

समाज की कसौटी पर लिव इन रिलेशनशिप

समाज की कसौटी पर लिव इन रिलेशनशिप। लिव-इन रिलेशनशिप एक विवादित मुद्दा है,जिस पर प्रत्येक व्यक्ति की अपनी अलग अलग राय और दृष्टिकोण है, लेकिन यहां हम बात करेंगे सामाजिक दृष्टिकोण की जिस समाज में हम रहते हैं या ये कहें जिस देश भारत में हम…

एक अन्धविश्वास जिसकी वजह से जा सकती थी १५० लोगों की जान

एक अन्धविश्वास जिसकी वजह से जा सकती थी १५० लोगों की जान लोगों में जब अंधविश्वास हावी हो जाता है तो वह फिर सही और गलत नहीं देखते हैं. अमूमन कहा जाता है कि भारत में सबसे ज्यादा अंधविश्वासी लोग पाए जाते हैं. पर यह सही नहीं है. भारत के…

आम आदमी की कमर तोड़ती इंग्लिश मीडियम शिक्षा

भारत में बेसिक शिक्षा की दशा बहुत ही सोचनीय है। सरकारी स्कूलों की होती बदहाली के पीछे कौन जिम्मेदार है सत्ता में रहने वाली सरकारों ने हजारों स्कूल खोल तो दिए हैं लेकिन उनमें आवश्यक सुविधाओं और अध्यन सामग्री की व्यवस्था करना भूल गई हैं। जिन…

बढ़ती विकास दर में कम होते रोजगार

बढ़ती विकास दर में कम होते रोजगार। नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को 3 वर्ष पूरे हो चुके हैं और इन 3 वर्षों में नरेंद्र मोदी जी ने बहुत से काम किए हैं जिनमें कुछ काम ऐसे है जिनसे आम जनता काफी प्रभावित हुई है।। जैसे भ्रष्टाचार को खत्म करने के…

बच्चों के लिए निवेश की पांच बेहतरीन योजनाएं

बच्चों के लिए निवेश की पांच बेहतरीन योजनाएं। सभी माता-पिता अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं जोकि अपनी कोशिशों से बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना चाहते हैं। लगातार महंगी होती शिक्षा माता-पिता की परेशानी को दोगुना कर देती है…

जीका वायरस और मंकी वायरस ने दी भारत में दस्तक

जीका वायरस और मंकी वायरस ने दी भारत में दस्तक। भारत कई सालों से स्वाइन फ्लू और वर्ड फ्लू की चपेट में रहा है परंतु अब जीका वायरस व मंकी फीवर भी भारत में प्रवेश कर चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अहमदाबाद में जीका वायरस से जुड़े तीन…

3 सालों में मोदी से कितना खुश हुए लोग

3 सालों में मोदी से कितना खुश हुए लोग देश में भाजपा की सरकार बने 3 साल हो गए हैं मोदी सरकार की लोकप्रियता तो इसी बात से झलकती है कि लोग अब भाजपा की सरकार नहीं मोदी की सरकार कहकर संबोधित करते हैं। भाजपा की सरकार से पहले केंद्र में…

मन और तन की शांति का साधन है- योग

योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "यजु" से हुई है जिसका अर्थ है- जोड़ना।। योग उस पद्धति को कहते हैं जो व्यक्ति को अपने आप में बांधें रखता है। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि को स्वयं में समेटे हुए योग ऊर्जा का…

समाज में बढ़ते तलाक की वजह

भारतीय समाज में पति पत्नी का रिश्ता बहुत ही पवित्र रिश्ता माना जाता है जो तदो परिवारों को जोड़ने की कड़ी होता है। पति पत्नी दोनों ही एक-दूसरे के पूरक होते है पति पत्नी के रिश्ते से खूबसूरत कोई रिश्ता नहीं होता अगर रिश्ते में मिठास हो और…

पाकिस्तान से बदला लेना जरूरी

भारतीय समाज में परिवार की बहुत अहमियत होती है। मां-बाप, भाई-बहन या भाई-भाई मैं आपस में प्रेम व सम्मान का रिश्ता होता है तभी परिवार में सुख शांति बनी रहती है लेकिन जब छोटा भाई बड़े भाई का सम्मान ना करें और विद्रोह पर उतर आए तो पहले उसे प्यार…

जीएसटी क्या है? जीएसटी से क्या सस्ता क्या महंगा

जीएसटी (गुड्स एवं सर्विस टैक्स) जो कि एक अप्रत्यक्ष कर है जीएसटी इस समय देश का चर्चित मुद्दा है क्योंकि जीएसटी को 1 जुलाई से लागू किया जाना है। जीएसटी के तरत वस्तुओं और सेवाओं पर समान रुप से टैक्स लगता है जीएसटी से पूरा देश एकीकृत बाजार में…

हिंदी की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार।

हिंदी भारत की राजभाषा है। राजभाषा किसी भी संघ या राज्य द्वारा अपने सरकारी कामकाज के लिए स्वीकार की गई भाषा होती है। राजभाषा देश के अधिकांश लोगों द्वारा बोली और समझी जाती है राजभाषा किसी प्रदेश में एक से अधिक भी हो सकती है प्रांतीय भाषाओं के…

महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरुक हो

प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं रही है। पुरुष सत्तात्मक समाज हमेशा से महिलाओं को केवल भोग विलास की वस्तु समझता आया है और महिलाओं को घर में चारदीवारी तक रखना ही अपना बड़प्पन समझा जाता है। हालांकि लोगों में…

नोटबंदी के बाद से अब विद्वानों को धनीजनों से किनारा कर लेना चाहिए

नोटबंदी के बाद से अब विद्वानों को धनीजनों से किनारा कर लेना चाहिए  विद्वान जन जो बहुत ही पढाई-लिखाई में बहुत ही तेज-तरार हुआ करते थे। वे 1950 से लेकर 1992 तक किसी धनीजन के साथ नहीं उठा-बैठा किया करते थे। तब समाजवाद था, समाजवाद में हर…

बजट २०१७ का अर्थव्यस्था पर असर

बजट २०१७ का अर्थव्यस्था पर असर वित्तीय वर्ष २०१७-२०१८ के लिए जब वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने बजट पेश किया तो सबसे ज़्यादा देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई की नज़र उन पर लगी थी | और बजट अभिभाषण के बाद यह कहा जा सकता है कि बजट आशावादी तो है…

बजट २०१७ उम्मीदों पर कितना खरा उतरा ?

बजट २०१७ उम्मीदों पर कितना खरा उतरा ? आज के राजनितिक परिवेश में सरकार का कोई भी निर्णय उम्मीदों के मापदंड पर केवल एक ही तरह से तौला जाता है कि आप किस दल के समर्थक हैं , यदि आप सत्ताधारी दल के समर्थक हैं तो बजट आपको बहुत बेहतर और ऐतिहासिक…

२००० का नोट – “धोखा”, “स्कैम” या “होशियारी”

२००० का नोट - "धोखा", "स्कैम" या "होशियारी" सरकार ने जो विमुद्रीकरण का कड़ा कदम उठाया है उसकी चारो और प्रशंसा हो रही है । भारत ही नहीं विदेशो में भी इस पर चर्चा हो रही है । कई देश अब इस पर विचार कर रहे है की उन्हें भी इस तरह के कदम उठाने…

रिलायंस डिफेंस राफाल डील – सच झूठ और प्रोपोगंडा

फ्रेडरिक नीत्शे ने एक बार कहा था "दुनिया में कुछ भी पूर्ण तथ्य नहीं है , केवल व्याख्याएं हैं"। जर्मन दार्शनिक और सांस्कृतिक आलोचक की यह बात वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में एकदम सटीक बैठती है। आजकल अनंत जानकारी एक उंगली के इशारे पर उपलब्ध…

धन्यवाद पाकिस्तान ! एक बुद्धिजीवी की कलम से

धन्यवाद पाकिस्तान । साधुवाद । मन कर रहा है तेरे आतंकियों के चरणों को छू लू जैसे की नरेंद्र मोदी ने नवाज़ शरीफ़ की माँ के छुए थे । तूने मुझ पर जो एहसान किया है उससे में जज्बाती हो गया हूँ । अगर फ़िल्मी अंदाज़ में कहूँ तो वह इस प्रकार होगा…
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