रोज रोज मिलना जरूरी है क्या ??

रोज रोज मिलना जरूरी है क्या ?? ये जो तुम रोज रोज नए कपड़े पहन कर आती हो,हर बार मुझे ही तारीफ करना जरूरी है क्या ?जब कभी अगर तारीफ ना करूं तो तुम रूठ जाती हो,हर बार मुझे ही मनाना जरूरी है क्या ?रोज रोज मिलना जरूरी है क्या ? यूं तू जब

मैं तेरा कभी होना सकूंगा – शशिधर तिवारी ‘ राजकुमार ‘

।। मैं तेरा कभी होना सकूंगा ।।।। तू मेरी कभी होना सकेगी ।। तुम्हारी मुस्कुराहट है कोई और , हमारी चाहत है कोई और , तुम्हारे वक्त का साथी है कोई और , हमारे जीवन की काठी है कोई और , मैं तेरा कभी होना सकूंगा , तू मेरी

काश तू मेरी होती – (कविता) – शशिधर तिवारी ‘ राजकुमार ‘

।।। काश तू मेरी होती ।।।तेरे ख्वाब मेरे होते,  और मेरे ख्वाब में तू होती । तेरे चेहरे की चमक मेरी होती ,  तेरी पायल की छन-छन मेरी होती । तेरे सपनो का मैं राजा होता । और तू मेरे सपनो की रानी होती ।। काश तू मेरी होती ।।

।। समझ बैठे ।। कविता || शशिधर तिवारी ‘ राजकुमार ‘

।। समझ बैठे ।। तेरी सारी ख्वाहिशों को , हम हमारी रहमत समझ बैठे। तेरी होंठो की मुसकुराहट को , तो हम हमारी चाहत समझ बैठे । तेरी ज़ुल्फो की घटाओ को , हम हमारी अमानत समझ बैठे । तेरी नयनों की पलकों को , तो हम हमारी
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