अब ना सीखे, तो फ़िर कभी ना सीखे…..

अब ना सीखे, तो फ़िर कभी ना सीखे….. क्या उड़ाएंगे हम किसी का मज़ाक ?हम खुद बन गए हैं अब एक मज़ाक । बहुत था ख़ुद पर अभिमान,अहंकार, शेखी, मद से बखान । आज सब धरा का धरा,क्रोधित प्रकृति, नम है धरा । बहुत करा है तिरस्कार,स्वार्थ,

दौर जाएगा बीत…

दौर जाएगा बीत… सिर्फ़ इक्कीस दिन,दे ये पलछिन । देदे ये मुझको,मेरे दर्द को समझो । मेरी है ये विनती,एक सुई के जितनी । ज़्यादा नहीं मांगा,देदे मुझे तू वादा । घर में तू बैठ,ना घूम, ना सैर । हो घर में बंद,वहां बहुत आनंद ।

खाड़ी देशों में तेल के दामों में लगातार गिरावट और भारत की अर्थव्यवस्था

खाड़ी देशों में तेल के दामों में लगातार गिरावट और भारत की अर्थव्यवस्था मेरे मन में पिछले कई दिनों से कुछ विचार अपने आप को इस बाहरी बहुमुखी प्रतिभावानो से परिपूर्ण इस दुनिया के सामने प्रस्तुत होने को व्याकुल हो रहा था । अतः आज मैं अपने

भगवान परशुराम जी की महिमा

भगवान परशुराम जी की महिमा करें स्वीकार नमन भगवान परशुराम, त्रेता व द्वापर युग में अवतरित नाम । 2 रामायण, भागवत पुराण, महाभारत और कल्कि पुराण । 4 इन ग्रन्थों में उनके उल्लेख, परशुरामजी के रूप अनेक । 6 देवराज इंद्र का था

कोरोना – सीख

कोरोना - सीख कोरोना दे रही ढेरों सीख,नए पाठ हर तारीख । रहें हमेशा हम सब स्वच्छ,रोगों से फ़िर जाएंगे बच । ना घबराएं, करें सजग,हड़बड़ाहट से रास्ता भटक । चकाचौंध छोड़ बनें सहज,षड्यंत्र का हो तहस नहस । हाथ से बेशक ना मिलें

बन देश भक्त

बन देश भक्त … मत डर बेशक,रह मगर सतर्क । घर क्या है पीड़ा ?बाहर बस कीड़ा‌ । घर समय गुज़ार,तेरा परिवार । ले आ ठहराव,एकांत में नांव । गर ना तू माना,सख़्ती जुर्माना । ख़ुद भी डूबेगा,साथ ले डूबेगा । थोड़ा जा संभल,कुछ तो जा

डॉक्टर – कविता

डॉक्टर मंदिर, मस्जिद, बोले गिरजाघर,ना आओ जब हों लक्षण । अस्पताल, क्लीनिक, बोले डॉक्टर,आओ जल्दी जब हों लक्षण । जब होता दुरुस्त, चंगा भला,इंसां करे ईश्वर शुक्रिया । मगर करे जब वैद्य से बात,बिल पर होता वाद विवाद । आश्चर्यजनक

मन की बात

मन की बात माना मज़दूर,बेबस मजबूर । क्या करे ?क्या ना करे ? हुआ लॉकडाउन,ये साथ में डाउन । हुआ बेरोजगार,जैसे लाचार । सब कुछ गया रुक,थमे ना पर भूख । आए मंत्री प्रधान,करी मन की बात । देश का सेवक,विनती हाथ जोड़कर । मांगे

बुद्धिजीवी …. तकनीकी खराबी …

बुद्धिजीवी …. तकनीकी खराबी … कुछ बुद्धिजीवी,देश के करीबी । आज मुझसे उलझ गए,दिए जलने से पहले ही बुझ गए । बेवजह की हो गई बहस,जैसे कुछ कर दिया हो तहस नहस । मुझसे रहा ना गया,मैंने बस उन्हें यही कहा । तैयार हैं ना भाई साहब ?नौ

“कर्तव्य परायणता” – आदित्य शर्मा

"कर्तव्य परायणता" आज सुनाता हूं मैं राजधर्म का आंखों देखा किस्सा,जिसमें कृष्ण, राम नहीं बल्कि मनुष्य का था अहम हिस्सा।वह कोई अष्टभुजा धारी नहीं ,ना ही कोई महान उद्योगी है,वह तो गेरुआ रंग धारी, कहलाता योगी है।। मुझे कल्पना कर ही

हमारा सहयोग – अभिनव कुमार

हमारा सहयोग सरकार को दें हम सब शाबाशी,मेहनत मशक्कत अच्छी खासी,पूरा भारत, ना सिर्फ़ हांसी,ना बीमारी, ना हो खांसी । सरकार कर रही दिल से प्रयत्न,कोशिश ना फैले, विषाणु हो ख़त्म,ना हों सामाजिक, ना अभी जश्न,अपने में हो अभी हर कोई मग्न ।

आपसा देश भक्त ना उत्पन्न अब तक

आपसा देश भक्त ना उत्पन्न अब तक …. माननीय प्रधान मंत्री,जन सेवक, भले मानस, संतरी । आपको कुछ बताना है,मैंने भी अब ठाना है । आप उन्हें भाते नहीं,कभी रास उनको आते नहीं,आप मगर अडिग है,कभी भी घबराते नहीं । उन्होंने आपको कभी नहीं

भगवान ही मालिक…इंदौर

भगवान ही मालिक… इंदौर,था यह शहर पुरजोर,पड़ा मगर कमज़ोर । दौर हुआ शर्मनाक,कट गई जैसे नाक,लगे देश पर दाग़ । डॉक्टरों पर हमला,सेवा का सिला !किस बात का गिला ? ईश्वर पर प्रहार,कैसा अत्याचार ?कलयुग का संसार । स्वास्थ्य

बन जाऊं मैं काश …. जैसे योगी कुमार विश्वास

बन जाऊं मैं काश …. जैसे योगी कुमार विश्वास … बन जाऊं मैं काश,जैसे योगी कुमार विश्वास,हरदम यही आस…हरदम यही आस । 4 आ जाए मुझमें प्रकाश,उन जैसा कि काश,भरसक प्रयास …भरसक प्रयास । 8 ना किंचित अंध विश्वास,है लबालब आत्म विश्वास,इसलिए वे

डॉक्टर, यानी ईश्वर

डॉक्टर,यानी ईश्वर । एक देव,साथ सदैव । या कहूं ख़ुदा,जो कभी ना जुदा । मेरा शुभचिंतक,सेवा करे अनथक । भगवान परमात्मा,हर दम मुझे थामता । स्वयंभू परमेश्वर,मौला का स्वर । अल्लाह नानक,मेरे जीवन का चालक । रखे हथेली पे जान,ये

पृथ्वी दिवस – अनीश कुमार

आज 22 अप्रैल पृथ्वी🌏 दिवस के उपलक्ष्य में मैं अपने विचार आप लोगों के साथ साझा करने जा रहा हूं| "पृथ्वी" इस शब्द का उच्चारण हम मानव जाति जितनी सरलता और सुगमता से करने में सक्षम हैं उतने ही अबोध, असमर्थ और अपरिपक्व इसके महत्व को

इंसान नहीं, आप ईश्वर – वैद्य, चिकित्सक, डॉक्टर

इंसान नहीं, आप ईश्वर… स्वीकार कीजिए कृतज्ञता,देशभक्ति की आप पटकथा । दिल से आभार,आप ना मानें हार । हर समय कार्यशील,जैसे पत्थर मील । करें देश की सेवा,ना रात, ना दिन देखा । आप हैं जैसे सैनिक,तत्पर और निर्भीक । छोड़ परिवार व

ख़तरे में है वसुंधरा! (पृथ्वी दिवस पर विशेष)

बचपन से आज तक दादी-नानी की कहानियो में सुनते आए है कि यह धरती हमारी माँ स्वरूपा है। हमें ये संस्कार मिले है कि सुबह उठते ही सबसे पहले इस धरती को वंदन करो। यही हमारे भारतीय संस्कार रहे है। किंतु अफ़सोस है कि हमने आज तक इन बातों पर अमल नहीं

दौर कुछ यूँ आया

दौर कुछ यूँ आया पशुओ को कैद  कर जो मनुष्यों  ने था कब्जा जमाया , अब उसी मनुष्य जाति को नियति ने घर पर बिठाया | - दौर कुछ यूँ आया   जिन अख़बारों की बस्ती मे जुर्म   के चेहरे थे बहुत , उस बस्ती मे सिर्फ एक चेहरा नजर आया |

प्रार्थना – आए सद्बुद्धि

प्रार्थना - आए सद्बुद्धि… सन्यासी "साधु",है देश का जादू । संस्कृत का शब्द,तन में जैसे रक्त । तप की मिसाल,संस्कृति की ढाल । त्याग का जीवन,सम हरदम है मन । सामान्य अर्थ 'सज्जन व्यक्ति',ईश्वर की अनथक भक्ति । मूल उद्देश्य
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