कवितादेश

राजा मौन खड़ा हो जाए

राजा मौन खड़ा हो जाए

राजा मौन खड़ा हो जाए
वर्तमान को भूत बताए
जनता फिर से बनती जाए
राजा मौन खड़ा हो जाए
माया से आंकड़ा छुपाए
जाति को ही कर्म बताए
राजा मौन खड़ा हो जाए
धर्म हीन हो धर्म सिखाए
रच कथा वो डर दिखाए
राजा मौन खड़ा हो जाए
सच्चा हो कर झूठ बताए
भक्षक बन लंगर सजाए
राजा मौन खड़ा हो जाए
सपनों के बदले द्वंद्व सजाए
सफेद वस्त्र धर गंद मचाए
राजा मौन खड़ा हो जाए
जहां भीड़ हो वहां वो जाए
जहां ऋण हो वहां वो गाए
राजा मौन खड़ा हो जाए

मैं 7 वी कक्षा से कविता लिखता हूँ। मै हिंदी साहित्य से कुछ सिखना चाहता हूँ और इसे कुछ देना चाहता हूँ । ईश शाह बांसवाडा, राजस्थान

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