कोरोना

कोरोना किसका रोना ?काहे का रोना ?आजकल सोते-जागते बस,कोरोना ही कोरोना। कोरोना वायरस डिजिज सेदिसम्बर 2019 को अस्तित्व में आया,नाम कोविड 19 पायातब से लगातार मचा रहा कोहरामइंसानी जिंदगी को कर दिया हराम सबसे कहता कोरोनाकोईरोड़ परना

ज़िंदगी – कविता अभिनव कुमार

ज़िंदगी ज़िंदगी एक बोझ है,आज के इंसान की यही खोज है । अरे ज़िंदगी तो एक बहार है,जीना आए तो प्यार, नहीं तो पहाड़ है । ज़िंदगी तो एक गीत है,उसे जीना ही एक जीत है । जो इसे ना जी सके, उसपर धिक्कार है,डर – डरकर जो जीता है, उसकी ज़िंदगी का

हम दिहाड़ी मजदूर कहाते

कर श्रम घर का बोझ उठाते हैं जब रोज कमाते तब खाते बेबस लाचारी में ही जीवन गवांते ना खुद पढ़े खूब ना बच्चे पढ़ा पाते हम दिहाड़ी मजदूर कहाते ना सपने आंखों पर अपने सज पाते बन आंसू पलकों से वो गिर जाते लक्ष्मी सरस्वती

कर्मवीर – कविता अभिनव कुमार

कर्मवीर कर्मवीर,यानि कर्मशील,कर्मठता पुरुषार्थ सहित,हिन्द हुआ इनपर गर्वित । (४) ये जैसे कि साहसी योद्धा,जीवनदायी निर्मल पौधा,ये खिलाड़ी, हम सब श्रोता,उत्तरदायित्व से ना समझोता । (८) फ़ौजी रहता सरहद पर,ये

ऋषि जी की फिल्में…बसती हर दिल में…

ऋषि जी की फिल्में…बसती हर दिल में… जितनी करी उन्होंने फिल्में,सारी उड़ेली इस रचना में । फिल्मों के सिवा कुछ ना इसमें,पाँच दशक की सारी फिल्में । किरदार बख़ूबी साँचे में ढाला,अर्पित श्रद्धांजलि इस माध्यम द्वारा । फिल्मों का इतना

ये ५६ इंच का सीना है

ये ५६ इंच का सीना है ये ५६ इंच का सीना है, कोई ऐसी वैसी ढाल नहीं…ये मोदी जी का पसीना है, मेहनत की उनकी मिसाल नहीं… दुखियों से दुख को छीना है, दिल साफ है बिल्कुल चाल नहीं…ये हिन्द देश का नगीना हैं, इनके बिन गलती दाल नहीं । जो कहते

कहूँ ऋषि कपूर या कोहिनूर

कहूँ ऋषि कपूर,या कोहिनूरदोनों समरूप,बेहद ही खूब । 4 किया नाम सार्थक,तप था अंत तक,सब अपने बलबूते पर,चूम लिया था अंबर । 8 चॉकलेटी छवि,प्यार की पदवी,था जैसे रवि,आकर्षित सभी । 12 निर्माता, निर्देशक,अभिनेता आकर्षक,चलता था अनथक,होते

एकांत – कविता

एकांत जाने कैसे लोग रहते हैं भीड़ में,हमें तो तन्हाई पसंद आई है । अकेले बैठ के अपने आप से बातें करना,रोज़ की आदत हो आई है । जो भरते थे दम अपनी दोस्ती का,साथ उठने बैठने का,आज उनमें भी ठन आई है । सच कहता हूं एकांत बहुत अच्छा है

भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी

भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हमारे देश के लिए हैं ये एक वरदान,कार्य जो भी करते होते हैं प्रधान । सबसे प्यारा इन्हे है अपना वतन,इनके लिए भारत है अनमोल रत्न । सभी नियमों का पालन करते और करवाते, वह भी बहुत सख्त,देश की

क्या करूं, क्या ना करूं ?

क्या करूं, क्या ना करूं ? मैं हूं मजबूर, हूं खुशी से दूर, लगी किसकी नज़र ? मेरा क्या कसूर ? ४ हूं बिल्कुल बेबस, ना सकता हंस, फैंका किसने जाल ? मैं गया हूं फंस । ८ बीच में हूं लटका, नज़रों में खटका, कुश्ती

शिकारा फिल्म – अभिनव कुमार

शिकारा चलचित्र शिकारा,है पानी खारा,किस और इशारा ?निर्देशक द्वारा ! जो दर्द था सारा,उसे कहां उतारा ?जो चड़ा था पारा,दिया कुछ और नारा । ना था हत्यारा,ना कोई अंगारा,बस नायक सितारा,उसको ही निखारा ! लहू लाल चौबारा,ज़िंदा था मारा,ना

इरफ़ान ख़ान, हर दिल की जान

इरफ़ान ख़ान, हर दिल की जान इरफ़ान ख़ान,हर दिल की जान,एक अलग पहचान,एक अलग पहचान । ४ १९६७ में जन्में साहबज़ादेबुलंद व नेक इरादे,जो कहते, वो निभाते वादे,अमल में लाते, ना सिर्फ बातें । ८ जन्म राजस्थान जयपुर,हरदम विवादों से दूरतपकर बना

इसी गंदगी का करना है अंत

लो आ गया नया ज़माना, स्वच्छ भारत बन गया है एक बहाना। क्या भारत की स्वच्छता का इरादा ,टूट रहा है यह स्वच्छ भारत का वादा। सैलानी हैं आते यहाँ, दिखती है गंदगी देखें जहाँ । क्या वैष्णो देवी की

हमें भगवान क्यों नहीं मिलते ?

हमें भगवान क्यों नहीं मिलते ? आज प्रतिभाशाली और कलात्मक लोगों द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास से भरी दुनिया है। इस दुनिया में विभिन्न प्रकार के लोग रहते हैं। उन सभी को, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रचनात्मक ईश्वर

अब बहुत हुआ – स्वदेशी अपनाओ

अब बहुत हुआ 130 करोड़ भारतीयों तक पहुंचाये. कोरोना महामारी ने बहुत नुकसान कर दिया मानव जाति का. CoronaStat.org वेबसाइट के अनुसार से अप्रैल 27 तक दुनिया में 30 लाख से ज्यादा लोगों संक्रमित हो चुके हैं. 2 लाख से अधिक मौतों. पर ये

मेरी ही ख़ातिर

मेरी ही ख़ातिर सिर्फ़ मेरी ख़ातिर ,ये सब हैं हाज़िर,ये हिन्द के नायक,कुछ करें ना ज़ाहिर । 4 बिन खुद की परवाह,मेरी करें रक्षा,दें सीख व शिक्षा,ये रब का दर्जा । 8 कल ना थी कद्र,अब होता फक्र,गोल घूमा चक्र,ये भले व भद्र । 12 ये जैसे

मैं आपका कश्मीर :-

मैं आपका कश्मीर :- आज मैं आज़ाद हूं ३७० की बेड़ियों से,आज मैं आज़ाद हूं अलगाववादी भेड़ियों से… दशकों से ही मैं था आतुर मिलने हिन्द महान से,मात-पिता से बिछड़ा हुआ था बिछड़ा अपनी जान से… आज ही सही मायनों में मेरी पहली आज़ादी है,आज

कविता की लंबाई… पे मत जा भाई

कविता की लंबाई… पे मत जा भाई … कविता जब शुरू करता हूं लिखनी,कोशिश कि बन पड़े तालाब जितनी । आरंभ से लग जाती है विचारों की झड़ी,जुड़ने लगती है फ़िर कड़ी से कड़ी । ख़ुद को बीच में मगर रोक नहीं पाता हूं,जज्बातों में बस बहता ही चला

MeriRai.com पर कविता

‘मेरी राय’ नया दिन, नई गाथाएँ,हर दिल समेटे असीम कथाएँ,सोचे – किसको वो सुनाए ?किस्से वो खुलके बतलाए ? 4 हरेक शख़्स संगदिल चाहे,चाहे गर्ल हो या हो ब्वाय,उसके मन को जो पढ़ पाए,दोष गुण दोनों अपनाए । 8 सब चाहें अभिनव अध्याय,हर एक प्राणी,

मुझको उम्मीद…

मुझको उम्मीद… संकट की घड़ी,है आन पड़ी । है वक़्त विकट,है डर, दहशत । तू जीतेगा,गम बीतेगा । विश्वास ले कर,ये परीक्षा पल । तू हिम्मत कर,हो निश्चय अचल । मत बुजदिल बन,अभी जारी जंग । खतरा ना टला,शत्रु है खड़ा । तू तोड़
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