कविता

राम राज्य – कविता अभिनव कुमार

राम राज्य,
बजें ढोल नगाड़े,
दुर्जन हैँ हारे,
हैं राम सहारे ।

नस नस में राम,
बसे हर कण राम,
है चारों धाम,
आठों पहर प्रणाम ।

भाई चारे की जीत,
एक नई उम्मीद,
रात गई है बीत,
आई लहर है शीत ।

अयोध्या नगरी,
दुल्हन है सजी,
खुशी सच में हंसी,
धूम घर घर मची ।

सदियों का संघर्ष,
हो रहा है सार्थक,
राम दे रहे दस्तक,
झुका सबका मस्तक ।

भेजा है न्योता,
आएं नानक मौला,
हुआ है समझौता,
हर मद को तोड़ा ।

मन रही दीवाली,
भरी सूनी थाली,
जहां नज़रें डाली,
लाल, पीली, गुलाबी ।

ख़त्म हुई प्रतीक्षा,
पूरी कसम प्रतिज्ञा,
आलोकिक दीया,
प्रकाशित किया ।

कितनी शहादत,
कितने हुए कत्ल,
आया अब फल,
कुर्बानी सफ़ल ।

जो थी कल्पना,
नमुमकिन सपना,
वो हकीकत बना,
घर रामलला ।

जन्मस्थान पे जश्न,
कलश भूमिपूजन,
सरोबार है मन,
भव्य आयोजन ।

आया शुभ दिन,
पावन पलछिन,
बाहर है जिन्न,
असंभव सम्पन्न ।

आधार शिला दी रख,
ऐतिहासिक उत्सव,
हिंदू संस्कृति पुनर्जन्म,
है स्वर्णिम अवसर ।

हनुमान जी विराजमान,
गदा और तीर कमान,
स्वागत पुष्प व हार,
जोश है बेशुमार ।

राम मेरा अस्तित्व,
राम हैं सर्वस्व,
राम मर्यादा व तप,
राम साहस संयम ।

राम को सब मानते,
राम की भी मानें,
राम चरित्र को जानें,
अपनाएं गंगा नहा लें ।

स्वरचित – अभिनव ✍🏻

Shri Ram
छवि सौजन्य: Miss Pallavi Soni
अभिनव कुमार एक साधारण छवि वाले व्यक्ति हैं । वे विधायी कानून में स्नातक हैं और कंपनी सचिव हैं । अपने व्यस्त जीवन में से कुछ समय निकालकर उन्हें कविताएं लिखने का शौक है या यूं कहें कि जुनून सा है ! सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि वे इससे तनाव मुक्त महसूस करते…

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