कविता

सुशांत का दुखांत

सुशांत का दुखांत

हूं मैं निशब्द,
बिल्कुल ही स्तब्ध,
जब चला पता,
सुन्न, स्थिर, हूं हिला ।

होए ना विश्वास,
लगे अभी भी पास,
सबका वो चहेता,
सच्चा अभिनेता ।

लांघी हर मझधार,
वो था दमदार,
अपने दम पर,
खड़ी की दीवार ।

था ज़मीं से जुड़ा,
दिल बहुत बड़ा,
था बेहतरीन,
लायक रंगीन ।

बाहर था शांत,
मौन चुप सुशांत,
अंदर तूफ़ान,
तन्हा सुनसान ।

यौवन का राजा,
हीरा था तराशा,
उससे थी आशा,
देता था दिलासा ।

लाखों में एक,
वो था एक शेर,
था छला गया ?
सो चला गया ।

ना शिकवे गिले,
थे होंठ सिले,
सबकी वाहवाही,
कभी नहीं बुराई ।

था बेहद मज़बूत,
पक्का था वजूद,
जीवंत व खुशदिल,
बिल्कुल ना बुज़दिल ।

बहुतों का सहारा,
उनका था किनारा,
था पढ़ा लिखा,
कर्मों से दिखा ।

तारों का दोस्त,
हंसमुख मदहोश,
जो बना मिसाल,
क्यों मानली हार ?

क्या हुई खता ?
ख़ुद को दी सज़ा !
मेहनती निपुण,
क्या नहीं थे गुण !

बस था शर्मीला,
इसका ही सिला ?
चड़ा सफलता सीढ़ी,
जिसे तरसे पीढ़ी ।

क्या था अवसाद ?
साझा ना बात !
दिल करता हल्का,
कुछ पर ना छलका ।

किसने उसे निगला ?
सूरज था ढला,
क्या चीज़ गई खा ?
क्या हुआ गुनाह ?

भाई भतीजावाद ?
या नारी से बर्बाद ?
ये एक पहेली,
हुई गंगा मैली ।

इतनी कामयाबी,
इतनी सारी शोहरत,
फ़िर भी बेताबी,
फ़िर भी बेबस !

वो था जीवंत,
कलयुग का संत,
वो एक महंत,
क्यों ऐसा अंत ?

खुशनुमा मुस्कान,
वो गाल में गड्डे,
ज़िंदादिल इंसान,
पीछे अच्छे अच्छे ।

हूं मैं हैरान,
क्या था अवसाद ?
क्यों था परेशान ?
वो मेरी जान,

मेरा अरमान,
खुशनुमा इंसान,
था वो नादान,
था एक मिसाल ।

आंखों का तारा 
वो एक किनारा,
मेरी पाठशाला,
वो जैसे हमारा ।

हो गया गुम,
हूं मैं गुमसुम,
धरा भी है नम,
रोये है नभ ।

ख़ुद में है देखी,
मैंने उसकी आभा,
ऊर्जा का लिफ़ाफ़ा,
ओझल, हूँ अभागा ।

जो भी किरदार,
डालता था जान,
वो एम एस धोनी,
अदाकारी रो दी ।

वो जैसे बसंत,
वरदान नीलकंठ,
कभी ना मन घड़ंत,
दिल शीशा स्पष्ट ।

था बहुत दयालु,
ना बिल्कुल चालू,
चेहरा था सुंदर,
मन और धुरंदर ।

हर कोण सम्पूर्ण,
हुनर से परिपूर्ण,
बिल्कुल ही निपुण,
थक जाएं गुण ।

परिश्रमी कर्मठ,
बिल्कुल ना हठ,
ओजस्वी तेजस,
प्रेरक दिलकश ।

चक्रव्यूह में फंसा ?
वो कहां धंसा ?
कलाकार मंझा,
असली शहंशाह …
असली शहंशाह …

स्वरचित – अभिनव ✍🏻

सुशांत सिंह राजपूत
चित्र सौजन्य: : सुशांत सिंह राजपूत -ऑयल पेंटिंग “साक्षी नागर”
अभिनव कुमार एक साधारण छवि वाले व्यक्ति हैं । वे विधायी कानून में स्नातक हैं और कंपनी सचिव हैं । अपने व्यस्त जीवन में से कुछ समय निकालकर उन्हें कविताएं लिखने का शौक है या यूं कहें कि जुनून सा है ! सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि वे इससे तनाव मुक्त महसूस करते…

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