कविता

गुरु से हर राह शुरू…

गुरु से हर राह शुरू…

गुरु शिष्य,
मनोरम दृश्य,
उज्ज्वल भविष्य,
अनुयायी कृतज्ञ ।

मिला गुरुमंत्र,
हो जा स्वतंत्र,
ना हो षड्यंत्र,
सर्वोपरि गणतंत्र ।

दी गुरुदक्षिणा,
ना नफ़रत घृणा,
ना उपकार गिना,
हर तरफ़ हिना ।

ऐसी दी सीख,
कम है तारीफ़,
ना भूख अधिक,
संतोष समीप ।

गुणवत्ता डाली,
पूरी भर दी प्याली,
बस बोल ना ख़ाली,
ना पुलाव ख़याली ।

ऐसे संस्कार,
सात्विक आहार,
जीवन साकार,
केवल परोपकार ।

तप की है खाद,
सबकुछ आबाद,
आशावादी बात,
वजह आशीर्वाद ।

संयम व विवेक,
बंदा बना नेक,
सबकी देखरेख,
एका में एक ।

ज्ञान भरसक कूटा,
कोई रोम ना छूटा,
बन गया अनूठा,
ना किसी ने लूटा ।

ना टस से मस,
कण कण में सच,
है न्याय कवच,
सृष्टि दी रच ।

शत शत नमन,
हिन्द नतमस्तक,
गुरु दे दस्तक,
आ जाए चमक ।

अनुग्रहित – अभिनव ✍

अभिनव कुमार एक साधारण छवि वाले व्यक्ति हैं । वे विधायी कानून में स्नातक हैं और कंपनी सचिव हैं । अपने व्यस्त जीवन में से कुछ समय निकालकर उन्हें कविताएं लिखने का शौक है या यूं कहें कि जुनून सा है ! सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि वे इससे तनाव मुक्त महसूस करते…

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