मन और तन की शांति का साधन है- योग

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योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द “यजु” से हुई है जिसका अर्थ है- जोड़ना।। योग उस पद्धति को कहते हैं जो व्यक्ति को अपने आप में बांधें रखता है। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि को स्वयं में समेटे हुए योग ऊर्जा का संचार करने का ऐसा सशक्त साधन है जिसकी और पूरी दुनिया आकर्षित हो चुकी है।

योग केवल बाहरी शरीर पर ही नहीं मन ओर आत्मा पर भी काम करता है यानी हम कह सकते हैं यह तन मन और आत्मा को साधे रखने में सक्षम है। योग में सैकड़ों आसान है जो संपूर्ण शरीर पर कार्य करते हैं जो शरीर को स्वस्थ व सुंदर बनाए रखने में सक्षम है वही योग मन को नियंत्रित कर मन को एकाग्र करता है जीवन में स्थिरता प्रदान करता है। हम कह सकते हैं कि तन और मन की शांति ही योग है जिसमें आप अपने तन के साथ-साथ आत्मा को भी बांधें रखते हैं।

मनुष्य के जीवन में दुखों का प्रारंभ कब होता है जब उसे अपनी भावनाओं पर अपने मन पर नियंत्रण नहीं रहता जब आपका मन एक जगह पर स्थिर नहीं रहता वहीं से दुखों का आगमन आपके जीवन में होता है, लेकिन योग उस स्थिति से आपको उबारता है आपके मन को एकाग्र कर भावनाओं को नियंत्रित करता है।

योग की उत्पत्ति भारत में ही हुई और पतंजलि को योग का जनक माना जाता है आज राष्ट्रीय नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग नए आयाम स्थापित कर चुका है 21 जून को पूरे विश्व में योग दिवस मनाया जाता है। 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक वर्ष 21 जून को विश्व योग दिवस के रुप में मनाए जाने को मान्यता प्रदान की थी उस दिन 193 देशों से योग को मान्यता मिलने के बाद योग पूरे विश्व भ्रमण पर निकल चुका है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग कई रिकॉर्ड बना चुका है प्रथम योग दिवस 21 जून 2015 को भारत की राजधानी नई दिल्ली में राजपथ पर पहला रिकॉर्ड बनाया गया जब 35,985 लोगों ने राजपथ पर एक साथ सबसे अधिक संख्या में योग किया इसके साथ ही उसी दिन दूसरा रिकॉर्ड बना कि 84 देशों के नागरिकों ने इस योग शिविर में हिस्सा लिया उस दिन यह 2 रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में दर्ज किए गए।

योग किसी भी धर्म, जाति, रंग में भेदभाव नहीं करता योग तो एक पद्धति है जो अलग-अलग आसनों पर कार्य करती है और आपके तन और मन को शांति प्रदान करती है। योग आध्यात्मिक और व्यवहारिक स्तर पर कार्य करता है आध्यात्मिक स्तर पर योग से जुड़ने का अर्थ है सार्वभौमिक चेतना के साथ व्यक्तिगत चेतना का एक होना वही व्यवहारिक स्तर पर योग शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित कर तालमेल बनाने का साधन है।। योग अधिकांश बीमारियों से लड़ने में सक्षम है आधुनिक विज्ञान पद्धति जिस रोग का उपचार ढूंढने में विफल रही है वहां योग ने अपनी उपस्थिति से रोग पर विजय प्राप्त की है। चलने फिरने में अक्षम लोगों ने योग को अपने जीवन में अपनाकर सामान्य जिंदगी जीने की कला हासिल की है।

भारत के साथ-साथ विदेशों में भी योग शिविर की स्थापना होने से करोड़ों लोगों को योग से जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ है भारत में आज जिस मुकाम पर योग पहुंच चुका है उसे इस मुकाम पर पहुंचाने में काफी हद तक बाबा रामदेव का योगदान भी रहा है बाबा रामदेव के योग शिविरों में करोड़ों लोग पहुंचकर अपनी समस्याओं का हल जानते हैं जिससे योग पर लोगों का विश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है। योग करने की कोई उम्र या समय सीमा नहीं होती किसी भी उम्र का व्यक्ति इसे अपने जीवन में अपना कर जीवन का सर्वांगीण विकास कर सकता है।

21 जून 2017 योग दिवस का तीसरा वर्ष है इस वर्ष करीब 150 देशों के साथ भारत योग कार्यक्रम में भागीदारी निभायेगा।। 21 जून को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी योग साधकों के साथ लखनऊ में योग करेंगे।

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