विषम ज्वर तथा पुराना ज्वर का उपचार

विषम ज्वर तथा पुराना ज्वर का उपचार

वैसे तो ज्वर के अनेक कारण देखे गए है | इस आर्टिकल में हम दो प्रकार के ज्वर के बारें में बात करने जा रहे रहे है विषम ज्वर एवं पुराना ज्वर | पहले बात करते है – विषम ज्वर | यह ज्वर सड़ा-गला या बासी भोजन खाने से प्रायः विषम ज्वर हो जाता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में जब तक विष का प्रकोप रहेगा तब तक यह ज्वर नहीं उतरेगा। यह ज्वर कभी सुबह को आ जाता है और कभी दोपहर तथा शाम को। कभी यह गर्मी देकर चढ़ता है और कभी ठंड पे! यह ज्वर प्रायः 7 मे 12 दिन तक बना रहता है। कुछ वैद्यों का कहना है कि यह आठवें दिन उत्तर जाता है।

विषम ज्वर के लक्षण:

शरीर में ज्वर बराबर बना रहता है। कभी-कभी यह एक दिन में दो बार चढ़ता है और कभी एक बार। वैसे ज्वर आने का समय निश्चित नहीं है। इस ज्वर का तीसरे दिन भी आते देखा गया है।

ज्वर आने पर शरीर अकड़-सा जाता है। सिर में दर्द होता है। हाथ-पैर ढीले पड़ जाते हैं। कफ तथा वायु भी बढ़ जाती है।

विषम ज्वर की चिकित्सा :

1. नीम की निंबौली की 2 गुठलियां, 10 ग्राम कलौंजी–दोनों को आग में भूनकर पीस लें। इसकी चार खुराक करें। खुराक गुड़ के साथ खाएं। कुछ दिनों में विषम ज्वर उतर जाएगा।

2. नीम की 4 पत्तियां, हरड़, नागरमोथा, सोंठ, चिरायता, जायफल, कुटकी, जवासा, कचूर, कटेरी, पीपल और पीपरामूल-सब समान भाग लेकर कूट लें और चूर्ण बना लें। फिर एक चुटकी चूर्ण सुबह और एक चुटकी शाम को शहद के साथ सेवन करें।

 3. नीम के पत्ते 15 ग्राम, सोंठ, काली मिर्च, हरड़, बहेड़ा, सेंधा नमक, जवाखार ये सब चीजें 5-5 ग्राम लेकर सबको पीसकर चूर्ण बना लें। रोज सुबह-शाम 2 चुटकी चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। इससे हर प्रकार का विषम ज्वर दूर हो जाता है।

4. नीम, परवल, हरड़, इंद्र जौ, गिलोय और जवासा का काढ़ा बनाकर पिए |

पुराना ज्वर

पुराना ज्वर के कारण

शरीर में अंदरूनी कमजोरी या खराबी के कारण  ज्वर नहीं टूटता। लगातार  ज्वर रहे, उसी को पुराना   ज्वर कहते हैं।

पुराना ज्वर के लक्षण

पुराने ज्वर के कारण भूख नहीं लगती, पूरे शरीर में दर्द होता है, हड्डियों में भी दर्द रहता है, दिन-प्रतिदिन कमजोरी बढ़ती जाती है, किसी काम में मन नहीं लगता यह सब इस रोग के लक्षण हैं।

पुराने ज्वर का उपचार

आधा चम्मच गिलोय का चूर्ण शहद में मिलाकर सेवन करें। आधा चम्मच भुने जीरे का चूर्ण, शहद के साथ रोगी को चटाएं। दस ग्राम सोंठ का काढ़ा, शहद में मिलाकर गुनगुना करके पी जाएं |

थोड़ी से नीम की छाल को कूटकर एक कप पानी में काढ़ा बना लें | इसे छानकर इसमें शहद मिलाकर रोगी को गरम-गरम पिलाएं |

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