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ख़ास

बन देश भक्त

बन देश भक्त … मत डर बेशक,रह मगर सतर्क । घर क्या है पीड़ा ?बाहर बस कीड़ा‌ । घर समय गुज़ार,तेरा परिवार । ले आ ठहराव,एकांत में नांव । गर ना तू माना,सख़्ती जुर्माना । ख़ुद भी डूबेगा,साथ ले डूबेगा । थोड़ा जा संभल,कुछ तो जा

“कर्तव्य परायणता” – आदित्य शर्मा

"कर्तव्य परायणता" आज सुनाता हूं मैं राजधर्म का आंखों देखा किस्सा,जिसमें कृष्ण, राम नहीं बल्कि मनुष्य का था अहम हिस्सा।वह कोई अष्टभुजा धारी नहीं ,ना ही कोई महान उद्योगी है,वह तो गेरुआ रंग धारी, कहलाता योगी है।। मुझे कल्पना कर ही

आपसा देश भक्त ना उत्पन्न अब तक

आपसा देश भक्त ना उत्पन्न अब तक …. माननीय प्रधान मंत्री,जन सेवक, भले मानस, संतरी । आपको कुछ बताना है,मैंने भी अब ठाना है । आप उन्हें भाते नहीं,कभी रास उनको आते नहीं,आप मगर अडिग है,कभी भी घबराते नहीं । उन्होंने आपको कभी नहीं

डॉक्टर, यानी ईश्वर

डॉक्टर,यानी ईश्वर । एक देव,साथ सदैव । या कहूं ख़ुदा,जो कभी ना जुदा । मेरा शुभचिंतक,सेवा करे अनथक । भगवान परमात्मा,हर दम मुझे थामता । स्वयंभू परमेश्वर,मौला का स्वर । अल्लाह नानक,मेरे जीवन का चालक । रखे हथेली पे जान,ये

ख़तरे में है वसुंधरा! (पृथ्वी दिवस पर विशेष)

बचपन से आज तक दादी-नानी की कहानियो में सुनते आए है कि यह धरती हमारी माँ स्वरूपा है। हमें ये संस्कार मिले है कि सुबह उठते ही सबसे पहले इस धरती को वंदन करो। यही हमारे भारतीय संस्कार रहे है। किंतु अफ़सोस है कि हमने आज तक इन बातों पर अमल नहीं

प्रार्थना – आए सद्बुद्धि

प्रार्थना - आए सद्बुद्धि… सन्यासी "साधु",है देश का जादू । संस्कृत का शब्द,तन में जैसे रक्त । तप की मिसाल,संस्कृति की ढाल । त्याग का जीवन,सम हरदम है मन । सामान्य अर्थ 'सज्जन व्यक्ति',ईश्वर की अनथक भक्ति । मूल उद्देश्य

लॉक डाउन २.०

लॉक डाउन २.० चौदह अप्रैल दो हज़ार बीस,माननीय प्रधान मंत्री जी की स्पीच । देश के नाम संबोधन,पहुंचा हर जन तक । कई बड़ी और अहम बातें,क्या क्या कहा, हम हैं बताते ! उनकी बातों को संजोया,माला में है पिरोया । ज़रा कीजिए ध्यान,रचना

इसके पहले की हो जाएँ -बैक टू लाइफ़ !

इसके पहले की हो जाएँ -बैक टू लाइफ़ ! साइकल ,जब एक अनजाने घाट पर बिन पैडल मारे सरकने लगती है, तो मेहनत ज़रूर कम हो जाती है , लेकिन एक वैकल्पिक ख़तरे का एहसास , उस आरामदेही सफ़र का मज़ा नहीं लेने देता ।ठीक उसी तरह जब जीवन के सफ़र में

जिद है अगर तो जीतोगे

जिद है अगर तो जीतोगे उठ तैयार हो फिर हर बार, जितनी बार भी तुम गिरोगे, जिद है अगर तो जीतोगे, चाहे वक़्त ना हो साथ, भले छुटे अपनों का हाथ, हर अंधियारा दूर कर देगा नाथ, सूखे में भी आंसुओं से जब, अपने सपनों को तुम

युवा का अब आगाज हो

युवा का अब आगाज हो युवा का अब आगाज हो,एक नया अन्दाज़ हो,सिंह की आवाज हो,हर युवा जांबाज़ हो। हृदय विशाल जहाज़ हो,निर्भीक समक्ष यमराज हो,उज्ज्वल आभामय पुखराज़ हो,योग्य योद्धा योगीराज हो। जहाँ उम्र की दराज हो,वहाँ बड़ों का लिहाज़

है ये बड़ी संयम की घड़ी

है ये बड़ी संयम की घड़ी है ये बड़ी संयम की घड़ी,, आओ तोड़ें संक्रमण की कड़ी, रहें कुछ दिन घर में ही सभीं, तभी जितेंगे जिंदगी की लड़ीहै ये बड़ी विकट घड़ी, जहां जिंदगी बेबस है पड़ी है ये बड़ी संयम की घड़ी है

मैं तेरा कभी होना सकूंगा – शशिधर तिवारी ‘ राजकुमार ‘

।। मैं तेरा कभी होना सकूंगा ।।।। तू मेरी कभी होना सकेगी ।। तुम्हारी मुस्कुराहट है कोई और , हमारी चाहत है कोई और , तुम्हारे वक्त का साथी है कोई और , हमारे जीवन की काठी है कोई और , मैं तेरा कभी होना सकूंगा , तू मेरी

इस महिला दिवस , गृहणियों को क्यू नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़ना चाहिए 

इस महिला दिवस , गृहणियों को क्यू नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़ना चाहिए नेटवर्क मार्केटिंग या मल्टी-लेवल-मार्केटिंग (MLM) एक ऐसा माध्यम है जिसमें मार्केटिंग कंपनियां अपने उत्पादों के बेचने के लिए नेटवर्क बनाते है |ये एक ऐसा

हॉकी के भीष्म पितामह “अमर” हो गए

जिस राष्ट्रीय खेल, हाकी, को हम क्रिकेट के कारण भूलते जा रहे हैं, उस खेल की सेवा में PT सर का योगदान अद्वितीय है| मंदसौर के सेंट थॉमस स्कूल के स्पोर्ट्स टीचर श्री अमरसिंह जी ने ना सिर्फ अपने स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को खेल से जोड़ा बल्कि…

ढोंगी ‘ईश्वर’ के पाखंडी भक्त हैं ‘हम’

'धर्म हमारे मस्तिष्क में ठोके गये एक किल (खूँटा) के माफिक है, जिसने हमारे सोचने,समझने, सवाल पूछने एवं तर्क करने कि क्षमता को अपने में बाँध लेने का काम किया है । इंसान का विचारशील होना तभी सम्भव है, जब उसका मस्तिष्क स्वतंत्र विचरण कि अवस्था…

क्रिप्टो करेंसी क्या है यह कैसे काम करता है

क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी करेंसी है जो कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनाई गई होती है। क्रिप्टो करेंसी एक स्वतंत्र मुद्रा होती है इस मुद्रा का कोई मालिक नहीं होता, हम यह कह सकते हैं कि क्रिप्टो करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में नहीं होती। रुपया,…

आत्म विश्वास से जीती जा सकती है दुनिया

आत्मविश्वास शब्द की व्युत्पत्ति दो शब्दों से मिलकर हुई है आत्मा और विश्वास। आत्मा का मतलब होता है स्वयं से और विश्वास यानी भरोसा। कोई भी कार्य करते समय स्वयं पर यह भरोसा होना कि वह उस कार्य को कर सकता है वही आत्मविश्वास होता है। आत्मा…

भारतीय संस्कृति में पितृ पक्ष (श्राद्ध) का महत्व

भारत में पित्रपक्ष की शुरुआत 5 सितंबर से हो गई है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार पितृ पक्ष की अवधि 15 दिनों तक रहेगी, पितृ पक्ष में अधिकतर हिंदू अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं। श्राद्ध में मुख्य रूप से अपने पूर्वजों को याद किया जाता है…

इन आदतों को खुद से करें अलविदा

आदतें बदलना थोड़ा मुश्किल अवश्य होता है लेकिन नामुमकिन नहीं होता। लोगों में कुछ आदतें ऐसी होती हैं जिनकी वजह से आपसी संबंध और सामाजिक संबंध खराब होने लगते हैं। इसीलिए खुद के अंदर छुपी ऐसी आदतों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। चलिए जानते…

शिक्षा प्रदाता शिक्षक, समाज का मूर्तिकार होता है

इतिहास इस बात का साक्षी है कि, प्रत्येक समय में महान दार्शनिक ही महान शिक्षा शास्त्री ही हुये है। प्लूटो, सुकरात,लॉक कमेनियस,रुसो, फेबिल, गॉधी टेगौर,अरविन्द घोष, स्वामी विवेकानंद आदि। इन सभी दार्शनिकों ने अपने अपने दर्शन को क्रियात्मक और…
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