सरदार पटेल की जीवनी

सरदार पटेल की जीवनी को रचना में पिरोने का प्रयास :-

सरदार पटेल,
जैसे दिये में तेल,
वे तेज़ गुलेल,
अंग्रेज़ किए ढेर । 4

थे बहुत ही नेक,
सदियों में एक,
कुछ अलग चमक,
था जुनून सनक । 8

गुजरात में जन्म,
बचपन से ही दक्ष,
थे सदैव निष्पक्ष,
सटीक उपयुक्त लक्ष । 12

गए लन्दन, की पढ़ाई,
बैरिस्टर की उपाधि पाई,
वापस आए जब वल्लभभाई,
वक़ालत से रोज़ी रोटी चलाई । 16

गांधी जी के सुने विचार,
हुए प्रेरित, जैसे गए हों जाग,
आन्दोलन में बढ़ चढ़कर लिया भाग,
आज़ादी घर करी दिल-ओ-दिमाग । 20

खेडा संघर्ष पहली सफ़लता,
बारडोली सत्याग्रह में नेतृत्वकर्ता,
‘सरदार’ उपाधि से मिला नया रास्ता,
उन जैसा कोई हो नहीं सकता । 24

आज़ादी के पश्चात देदी प्राथमिकता,
५६२ देसी रियासतों की ख़त्म की सत्ता,
भारत में मिलाया उन्हें बिन कोई हिंसा,
महान योगदान, लौह पुरुष का दर्जा । 28

राज्यों की समस्या थी जितनी जटिल,
उतनी परिपक्वता से किया उसे हल,
एकीकरण देख गांधीजी हुए प्रसन्न,
विश्व इतिहास आश्चर्यचकित क्षण । 32

भारतीय राजनीतिज्ञ,
जिए देश के लिए,
सबके लोकप्रिय,
जैसे राम सिये । 36

वे जैसे संतरी,
पहले उप-प्रधानमंत्री,
वो देशभक्त, एक क्रांति,
समेटे संग भरपूर शांति । 40

भारतीय अधिवक्ता,
एक कुशल प्रवक्ता,
उनकी आवश्यकता,
हर पल हर लम्हा । 44

भारतीय गणराज्य,
खुले भाग्य,
संस्थापक प्राज्ञ,
परोकारी कार्य । 48

हिन्द की स्वाधीनता,
निभाई अहम भूमिका,
एकीकरण व एकता,
मार्गदर्शन व श्रेष्ठता । 52

नेहरू की उनसे ना थी बनती,
दोनों में अक़्सर ही थी ठनती,
पटेल ना हटी और ना ही घमंडी,
धरा से जुड़ी थी उनकी हस्ती । 56

सोच विचार वे करते थे कम,
करने में सिर्फ़ उनका दमखम,
ना ख्याति इच्छुक, ना कोई अहम,
जितनी तारीफ़, उतनी पड़े कम । 60

नेहरू को था किया सावधान,
चीन शत्रू, करे विश्वासघात,
नेहरू मग़र जान-बूझकर अंजान,
आज भुगत रहा हिन्दुस्तान । 64

कश्मीर का मसला ना था छुटपुट,
नेहरू के फैसलों से थे वे क्षुब्ध,
पैरों पे मारी कुल्हाड़ी ख़ुद,
खौला ख़ून, थे बेहद ही क्रुद्ध । 68

पाकिस्तान की जो भी थी चालें,
वे उनको भलीभांति थे जानते,
उनकी चेतावनी गर नेहरू मानते,
आज तक साँप को यूं ना पालते । 72

कूटनीतिज्ञता तथा दूरदर्शिता थी,
गज़ब कार्यशैली व निजता थी,
हिन्द की बहुत उन्हें चिंता थी,
उनमें इंसानियत ज़िंदा थी । 76

१९५० में हुआ उनका देहान्त,
लगा ऐसे, हुआ सतयुग अंत,
कर्मठ, तपस्वी, वे थे एक संत,
गुण भरपूर, अच्छाइयां अनंत । 80

कुछ और वर्ष यदि होते वे जीवित,
नौकरशाही में कायाकल्प होता निश्चित,
मिटता भ्रष्ट्राचार, ज़्यादातर शिक्षित,
हिन्द की कुछ और ही अब होती तस्वीर । 84

मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित,
अहमदाबाद हवाई अड्डा उनसे है सुसज्जित,
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी उन्हें दिल से समर्पित,
ऐसे वीर पाकर माटी है गर्वित । 88

स्वरचित – अभिनव ✍

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