मत सोच तेरे मुकद्दर मे क्या लिखा है ।
जो नही लिखा है उसे लिखना सीख ।।
क्या सोचती है दूनिया तेरे लिए इसे छोड़।
तु बस अपनी मंजिल को पाना सीख ।।
कौनसा रास्ता जाता है उस मंजिल तक ।
तु बस उस सही रास्ते को खोजना सीख ।।
सीख लिया तुमने दृढ निश्चय,तप करना ।
फिर नही पड़ेगा तुम्हे किसी को कहना ।।
‘अजेय’ तु होगा ना तुझसे कोई विजय होगा ।
दुनियां तो क्या,मुक्कदर भी तेरा रफी़क होगा।।
मुक्कदर भी तेरा रफी़क होगा
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