हम – कविता

हम

चाय के शौकीन हम
धुन में अपनी लीन हम
जब लगेगी अपनी किस्मत
होंगे तब रंगीन हम

छा रहा है बादलों का
हल्का सा पहरा यहां
हो चला सबकुछ धुआं सा
अब है आती नींद कम।

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