जब मैं कुछ नहीं करता हूँ
तब मुझे दोषी करार दिया जाता है।
जब कुछ करूँ तो फिर मेरा क्या हश्र होगा?
मैं डरता हूँ नजरों के अंधियारो से
डरता हूँ शब्दों की तलवारो से
सहमा हूँ रिश्तों के बटवारे में
पला हूँ आँसुओ की आँखों में
चार आँखे वाले मेरे जीवन के सफर को क्या जानेंगे ?
मै तो खुद कभी -कभी अपने सफर के रास्तों को भूल जाया करता हूँ।
अपनी इसी नाकामी को आपसे जाया करता हूँ।
शायद मेरे पास नकाब एक ही है,
इसलिए लोगो को पसंद नहीं आया करता हूँ ।
पर मैं एक पेड़ हूँ जो फल आपके लिये लगाता हूँ, फिर भी बन्द दरवाजे देख पाता हूँ ।
पदो की लालच में मुझे इस्तमाल किया गया ,
उन्होँने खुद अपना वक्त बर्बाद किया,
मेरे लेखन को ओदारने से विचार नहीं बदलेंगे
और उत्तेजित हो जाएंगे
क्या लिखूं अपने जीवन के सन्दर्भ में , उम्र बित जाएगी
इसलिए मैं निर्दोष -निर्भय -निराश्रय रहना चाहता हूँ ,
सभी दुश्मनों को मित्र बनाना चाहता हूँ।
किंकर्तव्यविमूढ़ – कविता- ईश शाह
Related Posts
मुझे पता ही नहीं चला
उन सभी को जिन्होंनेअपने परिवार के लिए21 से 60 वर्ष कमाने मेंव्यस्त रहे। आज…
युवा का अब आगाज हो
युवा का अब आगाज हो युवा का अब आगाज हो,एक नया अन्दाज़ हो,सिंह की आवाज हो,हर युवा…
ना तेरा कसूर है…ना मेरा कसूर – बृजेश यादव
ये जो मदहोशी सी छायी है, तेरे हुस्न का सब कसूर है। ये जो खोया खोया सा मैं रहता…
माँ – कविता (प्रभात पाण्डेय)
माँ के जीवन की सब साँसे बच्चों के ही हित होती हैं चोट लगे जब बालक के तन को आँखें…
मैं एक हिन्दू हूं
मैं एक हिन्दू हूं पहले मैं किन्तु परंतु था,अब मगर केंद्र बिंदु हूं,गर्व से कहता…
मैं उसके घर गया था
मैं उसके घर गया थाअपने किसी काम सेउसके शौहर से मिलावो भी वाकिफ़ था मेरे नाम…
एकांत – कविता
एकांत जाने कैसे लोग रहते हैं भीड़ में,हमें तो तन्हाई पसंद आई है । अकेले बैठ के…
और जब मोहब्बत का रुख़ बदलेगा..
और जब मोहब्बत कारुख़ बदलेगाअपनी दिखावट सेअपने होने भर केअहसास मेंतब,अपनी कहानी…
अग़र मै और तुम एक हो जाएं
अग़र मै और तुम एक हो जाएं, जग की सारी खुशी मुझे मिल जाए | होंगे एक तो लहरें…
मन का शोर – शशिकांत सिंह
बिन पूछे सदा जो उड़ता ही चलेएक पल को भी कभी जो ना ढलेहै अटल ये टाले से भी ना…
इरफ़ान ख़ान, हर दिल की जान
इरफ़ान ख़ान, हर दिल की जान इरफ़ान ख़ान,हर दिल की जान,एक अलग पहचान,एक अलग पहचान । ४…
दौर कुछ यूँ आया
दौर कुछ यूँ आया पशुओ को कैद कर जो मनुष्यों ने था कब्जा जमाया , अब उसी मनुष्य…
शिकारा फिल्म – अभिनव कुमार
शिकारा चलचित्र शिकारा,है पानी खारा,किस और इशारा ?निर्देशक द्वारा ! जो दर्द था…
प्रेम एक स्वछंद धारा
प्रेम एक स्वछंद धारा एक प्रेम भरी दृष्टि और दो मीठे स्नेहिल…
इंसान नहीं, आप ईश्वर – वैद्य, चिकित्सक, डॉक्टर
इंसान नहीं, आप ईश्वर… स्वीकार कीजिए कृतज्ञता,देशभक्ति की आप पटकथा । दिल से…
अज़य कीर्ति छद्म रचनाएँ – 14
कितने साल गुज़र गए तेरी गलियों में आते-जाते पता ही नहीं चला, ना तू मिल सकी ना…
G20 – तारीफ़ तो बनती है
नमस्कार🙏🏻G20 दिल्ली शिखर सम्मेलन 2023 की सफ़लता अब जग ज़ाहिर है…
काश तू मेरी होती – (कविता) – शशिधर तिवारी ‘ राजकुमार ‘
।।। काश तू मेरी होती ।।।तेरे ख्वाब मेरे होते, और मेरे ख्वाब में तू होती । तेरे…
श्री लाल बहादुर शास्त्री …
श्री लाल बहादुर शास्त्री … मुगलसराय ख़ुशक़िस्मत,हुई जैसे रहमत,खुल गए कपाट,अवतरित…
कर्मठ बनो
कर्मठ बनो भूलना भूल जाओ सूली पर झूल जाओ,दिन देखो ना रात अभी आंखों में तुम खून…






































