इश्क की गली हमको, रास ना आए
जो रास आए ,उसको हम खो ना पाएं
एक नाव पर सवार होकर,चलना चाहता हू़ं
तु ही नाविक है ए-खुदा,जिन्दड़ी पार लगाई
Related Posts
अज़य कीर्ति छद्म रचनाएँ – 17
दुनिया का सबसे अमीर आदमी झोपङी मे रहता हैं,महल में तो गरीब रहते हैं अज़य कीर्ति…
रीझ-रीझ कर खीझ रहा हूँ
रीझ-रीझ कर खीझ रहा हूँ , जब से जग में होश संँभाला । प्रेम पुरातन याद नहीं…
युवा का अब आगाज हो
युवा का अब आगाज हो युवा का अब आगाज हो,एक नया अन्दाज़ हो,सिंह की आवाज हो,हर युवा…
ऋषि जी की फिल्में…बसती हर दिल में…
ऋषि जी की फिल्में…बसती हर दिल में… जितनी करी उन्होंने फिल्में,सारी उड़ेली इस…
अज़य कीर्ति छद्म रचनाएँ – 18
मनुष्य को फूलों के विकास पर ध्यान देना चाहिए फल तो अपने आप लग जाएंगे| अज़य…
अज़य कीर्ति छद्म रचनाएँ – 16
मुझे किताबों ने क्या सीखाया और क्या सीखा रही हैं, मैं ब्यां नहीं कर सकता,यदि…
आऊंगा फ़िर, पाप करने ख़तम …
आऊंगा फ़िर, पाप करने ख़तम … है माखन चोर,मेरा नन्द किशोर,जैसे नाचे मोर,उसका ही दौर…
अजय कीर्ति छद्म रचनाएँ – 11
तेरी ज़िन्दगी का हर मोङ सुकुन से भरा होगा |मै नहीं तो कोई और तो तुझ पर मरा होगा…
अभिनव कुमार – छद्म रचनाएँ – 11
क्या बुरा किया था ?ये तो बता दो ।बताकर कसूर,फिर बेशक सज़ा दो । अभिनव कुमार…
ना तेरा कसूर है…ना मेरा कसूर – बृजेश यादव
ये जो मदहोशी सी छायी है, तेरे हुस्न का सब कसूर है। ये जो खोया खोया सा मैं रहता…
चार पंक्तिया
हमने चार पंख्तियाँ क्या लिख दीं लोगों ने कवि बना दिया भरे बजार में हाले-दिल का…
अभिनव कुमार – छद्म रचनाएँ – 10
बढ़े से भी खाता हूं,छोटे से भी खाता हूं,गालियां खाने की आदत है,अपना धर्म निभाता…
मेरे पास सयाने मोदी हैं
मेरे पास सयाने मोदी हैं घुटनों पर तुझको ला दिया,अच्छे से तुझको झुका दिया,क्या…
जबसे उसके होंठों पे देखा एक छोटा-सा तील
जबसे उसके होंठों पे देखा एक छोटा-सा तील,तबसे उसी पल से हो गया हूँ उसके प्यार में…
राम राज्य – कविता अभिनव कुमार
राम राज्य,बजें ढोल नगाड़े,दुर्जन हैँ हारे,हैं राम सहारे । नस नस में राम,बसे हर कण…
अंतर ज़मीन आसमान का
अंतर ज़मीन आसमान का एक सोया रहा दो महीने,दूजे ने कसी कमर दो दिन में । एक ने किया…
!! तू कहे !!
!! तू कहे !! तू कहे तो तेरे पल्लू का आंचल चुरा लू ,तू कहे तो तेरे नयनो काजल चुरा…
ऐसा न हो कि चाँद मैं बन जाऊं !
अरे तुम कहाँ थेतुमसे मिलने आया था मैंअरे तुम कहाँ थेफिर से खिलने आया था मैंना…
विश्व पुस्तक दिवस – संदीप कुमार
आज विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर कुछ पंक्तियां पेश हैं, गौर फरमाएं। आज बहुत याद…
अभिनव कुमार – छद्म रचनाएँ – 4
बिन मतलब,गर तेरी तलब,मानो मिल गया रब,मिल गया रब । अभिनव कुमार आँखों से बात,कुछ…


































