कलम
शब्द कम पड़ जाते हैं
जब प्रेम उमड़ता है ढेर सारा
प्रियतम तक पहुचना
चाह्ती है कलम
दिल के हर जज्बात
छोटी-बडी बातें
बातों मे मुलाकाते
मुलाकतों मे बरसती बरसातें
दिन के एकाकी लम्हे
सांझ की कुम्ह्लायी उदासी
रातो मे जागती आखें
सपनों मे मिलन के क्षण
समेट कर अपने अन्दर
कलम निकल्ती है
शब्दों के समुन्दर मे
कश्ती बनकर
कलम – कविता – वंदना जैन
Related Posts
अज़य कीर्ति छद्म रचनाएँ – 17
दुनिया का सबसे अमीर आदमी झोपङी मे रहता हैं,महल में तो गरीब रहते हैं अज़य कीर्ति…
अज़य कीर्ति छद्म रचनाएँ – 16
मुझे किताबों ने क्या सीखाया और क्या सीखा रही हैं, मैं ब्यां नहीं कर सकता,यदि…
“एक पहाड़न”
पहाड़ों का भ्रमण चाय के लिए ढ़ाबे पर रूकना एक पहाड़न पहाड़ी टॉपी पहने हाथ में…
रीझ-रीझ कर खीझ रहा हूँ
रीझ-रीझ कर खीझ रहा हूँ , जब से जग में होश संँभाला । प्रेम पुरातन याद नहीं…
युवा का अब आगाज हो
युवा का अब आगाज हो युवा का अब आगाज हो,एक नया अन्दाज़ हो,सिंह की आवाज हो,हर युवा…
ना तेरा कसूर है…ना मेरा कसूर – बृजेश यादव
ये जो मदहोशी सी छायी है, तेरे हुस्न का सब कसूर है। ये जो खोया खोया सा मैं रहता…
चार पंक्तिया
हमने चार पंख्तियाँ क्या लिख दीं लोगों ने कवि बना दिया भरे बजार में हाले-दिल का…
ऐसा न हो कि चाँद मैं बन जाऊं !
अरे तुम कहाँ थेतुमसे मिलने आया था मैंअरे तुम कहाँ थेफिर से खिलने आया था मैंना…
मुझे पता ही नहीं चला
उन सभी को जिन्होंनेअपने परिवार के लिए21 से 60 वर्ष कमाने मेंव्यस्त रहे। आज…
अभिनव कुमार छद्म रचनाएँ – पर्यावरण
जीव जन्तु,जैसे शिव शंभू,बचाते पर्यावरण,ना किन्तु परन्तु ।अभिनव कुमार दो हाथ जब…
कलम – (कविता) अभिनव कुमार
कलम ✍🏻 छोटी बहुत ये दिखती है, प्रबल मग़र ये लिखती है,बड़ों बड़ों को…
मेरे पास सयाने मोदी हैं
मेरे पास सयाने मोदी हैं घुटनों पर तुझको ला दिया,अच्छे से तुझको झुका दिया,क्या…
काश तू मेरी होती – (कविता) – शशिधर तिवारी ‘ राजकुमार ‘
।।। काश तू मेरी होती ।।।तेरे ख्वाब मेरे होते, और मेरे ख्वाब में तू होती । तेरे…
एकांत – कविता
एकांत जाने कैसे लोग रहते हैं भीड़ में,हमें तो तन्हाई पसंद आई है । अकेले बैठ के…
भगत, राज, सुखदेव … जिस्म अलग, रूह मगर एक
भगत, राज, सुखदेव … जिस्म अलग, रूह मगर एक .. तेईस मार्च,को गिरी थी गाज,था भगत को…
राम राज्य – कविता अभिनव कुमार
राम राज्य,बजें ढोल नगाड़े,दुर्जन हैँ हारे,हैं राम सहारे । नस नस में राम,बसे हर कण…
समय का पहिया
समय का पहिया मानो तो मोती ,अनमोल है समय नहीं तो मिट्टी के मोल है समय कभी पाषाण…
दुनियादारी – (कविता)
उम्र के महल मे घूमती देह कोझुरियों की नजर लग गईमाथे की सिल्वटेंचिंता के सिलबट्टे…
मैं पथ हूँ
मैं पथ हूँ, मेरा ह्रदय छलनी मत करो मैं रोता हूँ, तुम देखने की कोशिश करो क्या…
सगी नहीं परायी ही सही
सगी नहीं परायी ही सही ,काश कोई मेरी भी बहन होती !! हर बात पर चिढ़ती, हर बात पर…



































