मैं पथ हूँ, मेरा ह्रदय छलनी मत करो
मैं रोता हूँ, तुम देखने की कोशिश करो
क्या गुनाह किया मैंने जो दर्द देते हो
मैं सबका हूँ , मेरा इम्तेहान लेना बंद करो
मत समझो मुझे अकेला, मेरा खुदा है
मैं देवता हूँ मुझे पूजने की कोशिश करो
मैं पथ हूँ
Related Posts
अज़य कीर्ति छद्म रचनाएँ – 17
दुनिया का सबसे अमीर आदमी झोपङी मे रहता हैं,महल में तो गरीब रहते हैं अज़य कीर्ति…
रीझ-रीझ कर खीझ रहा हूँ
रीझ-रीझ कर खीझ रहा हूँ , जब से जग में होश संँभाला । प्रेम पुरातन याद नहीं…
अज़य कीर्ति छद्म रचनाएँ – 16
मुझे किताबों ने क्या सीखाया और क्या सीखा रही हैं, मैं ब्यां नहीं कर सकता,यदि…
“एक पहाड़न”
पहाड़ों का भ्रमण चाय के लिए ढ़ाबे पर रूकना एक पहाड़न पहाड़ी टॉपी पहने हाथ में…
युवा का अब आगाज हो
युवा का अब आगाज हो युवा का अब आगाज हो,एक नया अन्दाज़ हो,सिंह की आवाज हो,हर युवा…
चार पंक्तिया
हमने चार पंख्तियाँ क्या लिख दीं लोगों ने कवि बना दिया भरे बजार में हाले-दिल का…
ना तेरा कसूर है…ना मेरा कसूर – बृजेश यादव
ये जो मदहोशी सी छायी है, तेरे हुस्न का सब कसूर है। ये जो खोया खोया सा मैं रहता…
अभिनव कुमार छद्म रचनाएँ – पर्यावरण
जीव जन्तु,जैसे शिव शंभू,बचाते पर्यावरण,ना किन्तु परन्तु ।अभिनव कुमार दो हाथ जब…
मेरे पास सयाने मोदी हैं
मेरे पास सयाने मोदी हैं घुटनों पर तुझको ला दिया,अच्छे से तुझको झुका दिया,क्या…
मैं…ख्वाब…और जाम !
मैं…ख्वाब…और जाम ! चाहत की है बात नहींमैंने सब यूं ही छोड़ दियाकैसे तेरे पास…
कलम – (कविता) अभिनव कुमार
कलम ✍🏻 छोटी बहुत ये दिखती है, प्रबल मग़र ये लिखती है,बड़ों बड़ों को…
प्रेम एक स्वछंद धारा
प्रेम एक स्वछंद धारा एक प्रेम भरी दृष्टि और दो मीठे स्नेहिल…
मुझे पता ही नहीं चला
उन सभी को जिन्होंनेअपने परिवार के लिए21 से 60 वर्ष कमाने मेंव्यस्त रहे। आज…
परमवीर चक्र …वीरों का पर्व
परमवीर चक्र …वीरों का पर्व … परमवीर चक्र,जब होता ज़िक्र,सिर शान से ऊंचा,होता है…
चुनावी मौसम
चुनावी मौसम चुनाव का मौसम आयाजन जन पर देखो छायाहोय सूट बूट या फटा पैजामासबका मन…
एकांत – कविता
एकांत जाने कैसे लोग रहते हैं भीड़ में,हमें तो तन्हाई पसंद आई है । अकेले बैठ के…
रोज रोज मिलना जरूरी है क्या ??
रोज रोज मिलना जरूरी है क्या ?? ये जो तुम रोज रोज नए कपड़े पहन कर आती हो,हर बार…
कहूँ ऋषि कपूर या कोहिनूर
कहूँ ऋषि कपूर,या कोहिनूरदोनों समरूप,बेहद ही खूब । 4 किया नाम सार्थक,तप था अंत…
छद्म रचनाएँ – सहज सभरवाल
यूँ मांगिये मत,देने की चाह रखिए।यूँ दीजिये मत,दान सहित, रईस दिल का इम्तिहान…
ये शाम भी ढल जाएगी
ये शाम भी ढल जाएगी … अपने से ज़्यादा,हो दूजे का ध्यान,,यही बस करना,,,है सबको…



































