कविता

गुरु वंदन

गुरु वंदन

गुरु शिष्य …
मनोरम दृश्य …

मुबारक हो आपको गुरु दिवस …
शिष्यों में गए आप हो बस …

आपके तप का मोल नहीं है …
गुरु बिन शिष्य का रोल नहीं है …

नमन है ऐसे रिश्ते को …
गुरु नामक फरिश्ते को …

गुरु ही देवे अच्छी सीख …
संस्कार बेहद बारीक़ …

नींव गुरु करे मज़बूत …
ईश का ज़रिया जैसे दूत …

जिसे मिले आपका आशीष …
नभ झुकाए उसको शीश …

गुरु ही देवे दूजा जन्म …
होते शुभ व अच्छे कर्म …

जीने की कला सिखाते आप …
दिल में छोड़ते अमिट हो छाप …

किस्मत वालों को मिलें गुरु …
तबसे नया जीवन शुरू …

उतर सके ना कभी भी ऋण …
आप समेटे लोक हो तीन …

गुरु को मेरा शत-शत वन्दन …
आठों पहर है अभिनंदन …

चुनोतियों से आपकी आता निखार …
हर दिन तेज़ होती धार …

गुरु होवे एक अद्भुत माध्यम …
जितनी तारीफ़ उतनी कम …

गुरु की महिमा अपरंपार …
शब्द कम जो व्यक्त विचार …

गुरु ब्रह्मा, विष्णु व शिव …
मार्गदर्शक, ज्ञानी, संजीव ।

अभिनव कुमार एक साधारण छवि वाले व्यक्ति हैं । वे विधायी कानून में स्नातक हैं और कंपनी सचिव हैं । अपने व्यस्त जीवन में से कुछ समय निकालकर उन्हें कविताएं लिखने का शौक है या यूं कहें कि जुनून सा है ! सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि वे इससे तनाव मुक्त महसूस करते…

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