रावण – छद्म रचनाये – अभिनव कुमार

काश कि कुछ ऐसा हो जाए,
रावण को सद्बुद्धि आ जाए,
ख़ुद भी जिए, जीने दे दूजा,
ज्ञान को सही दिशा चलाए l

अभिनव कुमार

रावण को जलाने वालों,
तुम क्यों रावण बन गए?
अब तो ज़िद छोड़दो अपनी,
अच्छे अच्छे बदल गए l

अभिनव कुमार

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