एक उसके लिए मैने कितनों से मुँह मोड़ा है,
पर परवाह कहाँ इस मतलबी ज़माने मे उसे हमारी,
उसने तो एक असली शायर से मुँह मोड़ा है।
पहचान कर भी नज़र अंदाज कर उसने मेरा दिल चूर–चूर कर तोड़ा है,
अहंकार नही है मुझमे, कोशिश पूरी थी मेरी।
अगर अब की बार भी उसने मुँह मोड़ा है,
तो समझ लेना कि शायर ने दिल से, जीवन भर के लिए उसे छोड़ा है।
एक उसके लिए मैने कितनों से मुँह मोड़ा है
Related Posts
कलम – (कविता) अभिनव कुमार
कलम ✍🏻 छोटी बहुत ये दिखती है, प्रबल मग़र ये लिखती है,बड़ों बड़ों को…
युवा का अब आगाज हो
युवा का अब आगाज हो युवा का अब आगाज हो,एक नया अन्दाज़ हो,सिंह की आवाज हो,हर युवा…
मैं उसके घर गया था
मैं उसके घर गया थाअपने किसी काम सेउसके शौहर से मिलावो भी वाकिफ़ था मेरे नाम…
फायदा ही क्या है
बे'वजह ,असमय बोलने मे तेरा फायदा ही क्या है, अपनी कमजोरियों को दिखाने से…
फिर भी सब हरा है
शब-ए-घोर अंधियारे में ,आज करूणा-कंठ भरे हैंकठोर हृदय मृदुल हुआ,सब आँखों में नीर…
आसमान के तारे
आसमान के तारे टिमटिमाते हैं रात भर तारे आसमान के,मन को हैं बहलाते वो सारे जहान…
अज़य कीर्ति छद्म रचनाएँ – 18
मनुष्य को फूलों के विकास पर ध्यान देना चाहिए फल तो अपने आप लग जाएंगे| अज़य…
और जब मोहब्बत का रुख़ बदलेगा..
और जब मोहब्बत कारुख़ बदलेगाअपनी दिखावट सेअपने होने भर केअहसास मेंतब,अपनी कहानी…
बन देश भक्त
बन देश भक्त … मत डर बेशक,रह मगर सतर्क । घर क्या है पीड़ा ?बाहर बस कीड़ा । घर…
अभिनव कुमार – छद्म रचनाएँ – 7
जीवन में कुछ करें ऐसे काम,चाहे ना हो अपना नाम,जिनसे हो गुलशन आवाम,देखे अल्लाह,…
आज़ादी की क़ीमत
आज़ादी की क़ीमत अगस्त का मास,आती है याद,शूरवीरों की,तप की तस्वीरों की । जागता है…
अज़य कीर्ति छद्म रचनाएँ – 16
मुझे किताबों ने क्या सीखाया और क्या सीखा रही हैं, मैं ब्यां नहीं कर सकता,यदि…
इश्क़ का इज़हार
इश्क़ का इज़हार बहुत ही आसान है किसी को दिल से प्यार करना।लेकिन आसान नहीं होता…
“एक पहाड़न”
पहाड़ों का भ्रमण चाय के लिए ढ़ाबे पर रूकना एक पहाड़न पहाड़ी टॉपी पहने हाथ में…
समय का पहिया
समय का पहिया मानो तो मोती ,अनमोल है समय नहीं तो मिट्टी के मोल है समय कभी पाषाण…
आऊंगा जरूर – अज़य कीर्ति
तुम्हे मिलने मै आऊंगा जरूरकभी राम बनकरकभी कृष्ण बनकरकभी सीता बनकरकभी राधा…
ग़म-ए-शायरी
ग़म-ए-शायरी दिल-ए-दर्द को शब्दों मे बयां कर दूंगा आंखों के आंसूओं को पन्नों पर…
ज़िंदगी – कविता अभिनव कुमार
ज़िंदगी ज़िंदगी एक बोझ है,आज के इंसान की यही खोज है । अरे ज़िंदगी तो एक बहार…
गांधी के सपनों का ,उड़ता नित्य उपहास है
गांधी के सपनों का ,उड़ता नित्य उपहास है वही पालकी देश कीजनता वही कहार हैलोकतन्त्र…






































