संकटमय आदमी,अदम्य साहस

छोड़ जाऊं तुमको ,पर उनको कैसे छोडूं
जी लूं मै जीवन,पर तन्हाई को कहां छोडूं


पल-पल तरसता हूं ,तुम्हारा प्यार पाने को
पर मा-बाप के प्यार को कैसे,क्यों‌ छोडूं

सपना तो हर रोज देखता हूं खुशियों का
पर दरिद्रता रूपी कठिनाई को कहां छोडूं‌

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मेरी नहीं बनती

नवरात्रि

मेरे सुखी जीवन की तलाश बहुत लम्बी‌ है
पर तृष्णा रूपी मोहजाल को कहां छोडूं

मरना चाहता हूं आज ,पर उनको कैसे मारूं
सपना हूं उनका,सपने को अधुरा कैसे छोडूं

इक सपना सफल हो जाए मेरा
छोड़ जाऊं दुनियां तो सबको याद आऊं

To my heartbeat word
By Ajay mahiya

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