मैं…ख्वाब…और जाम !

मैं…ख्वाब…और जाम ! चाहत की है बात नहींमैंने सब यूं ही छोड़ दियाकैसे तेरे पास रुकूंवेवजह कुछ करना छोड़ दिया जब जब मैं जाता राह अटकमैंने चांद निहारा सुबह तलकसब ख्वाब हैं मेरे चुभन भरेये जानके सबको तोड़ दिया टूटे ख्वाबों को मज़ार

कर्मठ बनो

कर्मठ बनो भूलना भूल जाओ सूली पर झूल जाओ,दिन देखो ना रात अभी आंखों में तुम खून लाओ,हरा भरा होगा सब जीवन बीज तुम्हारे अंदर है,चेहरा और चमन चमकेगा एक बार बस खिल जाओ। संघर्ष करो दृणता लाओ अपना घर आंगन महकाओ,जैसे रस्सी काटे पत्थर ऐसे

शुभम शर्मा ‘शंख्यधार’ – छद्म रचनाएँ

मैं आसमां और तू जमीं (शायरी)बड़ी लंबी नहीं है डोर जो है तेरी मेरीमैं आसमां तेरा तू है जमीं मेरीजब जब महसूस करता हूं करीब से खुद कोतेरी खुशबू से महकती है हर सांस ये मेरी।शुभम शर्मा 'शंख्यधार' तुम मेरा आईनाहर धड़कन धड़कती है तुमसे,हम जान

हम – कविता

हम चाय के शौकीन हमधुन में अपनी लीन हमजब लगेगी अपनी किस्मतहोंगे तब रंगीन हम छा रहा है बादलों काहल्का सा पहरा यहांहो चला सबकुछ धुआं साअब है आती नींद कम।

बस अभी अभी तो

बस अभी अभी तो…. अभी सूरज ढलाअभी चांद आ गयारात आंखों में थीमैं बोतल में आ गया अभी थे तारे खिलेअभी प्रभात आ गयाअभी बस आंख खुली किजुवां पे उसका नाम आ गया शुभम शर्मा 'शंख्यधार'

दादी कहानी सुनाओ ना !!

दादी कहानी सुनाओ ना !! दादी मां दादी मां कहानी एक सुनाओराजा रानी घोड़ा गाड़ी की बातें बतलाओआवाज तुम्हारी है मीठी मन को मेरे भाती हैहर बार नई कहानी दादी आप कहां से लाती हैं? हल्के से मुस्काके बोलीं दादी प्यार जाता के बोलींचिल्लम

मैं नई दुनिया निर्माण करूंगा

मैं नई दुनिया निर्माण करूंगा नहीं चाहिए कोई विरासत ना धर्म और न कोई आफतचारों तरफ मचा कोलाहल मैं इसमें शांति बहाल करूंगामैं नई दुनिया निर्माण करूंगा…. बच्चा बच्चा होता सच्चा जो पका नहीं वो होता कच्चाक्या है जीवन क्या उद्देश्य मैं इसकी

रवि के पास – शुभम शर्मा

रवि के पास… (रवि अर्थात सूर्य) सर्द सासें ओला बनके हैं जहन में बह रहींमन की गर्मी बाजुओं में बौखलाहट कर रहीरुक चुकी बहती पवन अब तो बस हिमपात हैले चलो मुझको वहां तुम जो रवि के पास है….. शांत मन है जोश उत्तम हृदय में आघात हैहै मजे में
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