बस अभी अभी तो

बस अभी अभी तो…. अभी सूरज ढलाअभी चांद आ गयारात आंखों में थीमैं बोतल में आ गया अभी थे तारे खिलेअभी प्रभात आ गयाअभी बस आंख खुली किजुवां पे उसका नाम आ गया शुभम शर्मा 'शंख्यधार'

दादी कहानी सुनाओ ना !!

दादी कहानी सुनाओ ना !! दादी मां दादी मां कहानी एक सुनाओराजा रानी घोड़ा गाड़ी की बातें बतलाओआवाज तुम्हारी है मीठी मन को मेरे भाती हैहर बार नई कहानी दादी आप कहां से लाती हैं? हल्के से मुस्काके बोलीं दादी प्यार जाता के बोलींचिल्लम

मैं नई दुनिया निर्माण करूंगा

मैं नई दुनिया निर्माण करूंगा नहीं चाहिए कोई विरासत ना धर्म और न कोई आफतचारों तरफ मचा कोलाहल मैं इसमें शांति बहाल करूंगामैं नई दुनिया निर्माण करूंगा…. बच्चा बच्चा होता सच्चा जो पका नहीं वो होता कच्चाक्या है जीवन क्या उद्देश्य मैं इसकी

रवि के पास – शुभम शर्मा

रवि के पास… (रवि अर्थात सूर्य) सर्द सासें ओला बनके हैं जहन में बह रहींमन की गर्मी बाजुओं में बौखलाहट कर रहीरुक चुकी बहती पवन अब तो बस हिमपात हैले चलो मुझको वहां तुम जो रवि के पास है….. शांत मन है जोश उत्तम हृदय में आघात हैहै मजे में
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